नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट के आगामी फेरबदल में सयानी घोष को मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिल सकती है। संभावित फेरबदल में टीएमसी की बागी सांसद को जगह को लेकर भाजपा के वो कुछ बड़े नेता परेशान हैं जो अरसे से मंत्री मंडल में फेरबदल का इंतजार है, लेकिन सयानी घोष को मोदी मंत्रीमंडल में जगह की चर्चाओं के बाद भाजपा के कुछ बड़े नेता सदमें में जरूर बताए जा रहे हैं। भाजपा में खासी चर्चा है कि मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच, सयानी घोष (जादवपुर से बागी सांसद) जैसी नई नवेली एनडीए सहयोगी को मंत्री पद दिए जाने की संभावना से पश्चिम बंगाल भाजपा के पुराने और जमीनी नेताओं में गहरी नाराजगी और चिंता है। भाजपा के पुराने खेमे का मानना है कि टीएमसी के ये बागी सांसद किसी विचारधारा के तहत नहीं, बल्कि केवल ‘सत्ता और पावर’ बचाने के लिए पाला बदल रहे हैं। पुराने नेताओं को डर है कि ऐसे नेताओं पर संकट के समय भरोसा नहीं किया जा सकता, जिससे भविष्य में पार्टी की साख खराब होगी। यही कारण हैं कि केंद्रीय नेतृत्व भले ही बंगाल में राजनीतिक समीकरण साधने के लिए सयानी घोष को आगे बढ़ा रहा हो, लेकिन जमीन पर सालों से पसीना बहाने वाले भाजपा के पुराने नेता इस संभावित फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
बंगाल भाजपा के पुराने नेताओं का मानना है कि जो नेता कुछ समय पहले तक पार्टी की विचारधारा को कोसते थे, उन्हें अचानक इतना बड़ा सम्मान देना पार्टी के मूल कैडर के साथ अन्याय है। पुराने नेताओं में यह डर है कि बाहरी और नए चेहरों के आने से राज्य की राजनीति में उनका खुद का कद और प्रभाव छोटा हो जाएगा। टीएमसी से जो 20 बागी सांसद अलग होकर एनडीए (NCPI गुट) के साथ आए हैं, उनमें सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार जैसे बेहद सीनियर नेता भी शामिल हैं। भाजपा के पुराने रणनीतिकार इस बात से भी परेशान हैं कि अगर सयानी घोष जैसे युवा चेहरे को सीधे मंत्री बनाया गया, तो बागी गुट के सीनियर नेताओं की नाराजगी एनडीए के आंतरिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।
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