मेरठ। 14 जुलाई को आए सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास परिषद के हाथों ध्वस्तीकरण के दहशत के चलते कारोबारी खुद ही अपनी बिल्डिंग गिराने को मजबूर हैं। कई भवनों में रविवार को ड्रिल मशीन और हथौड़ों से तोड़फोड़ का काम चलता रहा, जबकि कुछ संपत्ति स्वामियों ने खुद ही निर्माण हटाना शुरू कर दिया। रंगोली मंडप को जिस प्रकार से ध्वस्त किया गया है उससे वो 44 खासे परेशान और दहशत में हैं जिनके भवनों को आवास विकास परिषद ने सुप्रीमकोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेशों के बाद दोबारा सील किया है। नाउम्मीदी के चलते तथा राहत के सभी कानूनी रास्ते बंद होते देखकर लोगों के पास अब अपने भवनाें को खुद ही गिरवा देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। हालांकि सुप्रीमकोर्ट में दायर किए जाने के लिए पीआईएल भी तैयार है, लेकिन अब यह धारण बन गई है कि कुछ नहीं हो सकता। हालांकि लोगों का कहना है कि जिस प्रकार से दिल्ली के जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार घुटनों पर आयी है उसी तर्ज पर यदि कोई आंदोलन खड़ा कर दिया जाए तो शायद शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के जिन भवनों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी है वो बच जाएं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आंदोलन जंतर मंतर की तर्ज पर किया जाए, लेकिन जंतर मंतर की तर्ज पर आंदोलन तो दूर की बात यहां तो जिनके भवनों पर नोटिस नहीं लगे और ऐसे तमाम लोगों ने अब शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट को बचाने के लिए चलायी जा रही मुहिम से खुद को अलग कर लिया है। यहां तक कि मिटिंगों से भी दूरी बना ली है। ऐसे में कैसे जंतर मंतर की तर्ज पर आंदाेलन खड़ा किया जा सकता है। संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारियों और सत्ता व विपक्ष के नेता केवल राजनीतिक बातें तो करते रहे, लेकिन शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट को बचाने के लिए आंदोलन में सक्रिय भूमिका की बजाए रस्म अदायगी ज्यादा की। लोगों का कहना है कि ऐसे में फिर कहां इस आफत से अपने प्रतिष्ठानों को बचाया जा सकता है। इसी के चलते खुद तोड़ देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। कम से कम नुकसान तो कम होगा।
44 संपत्तियों पर लटक रही तलवार
इसी के चलते रंगोली मंडप, डॉ. सुधा अस्पताल और सेन फोर्ड अस्पताल में सामान निकालने के बाद भवन स्वामियों ने स्वयं सेटबेक के नाम पर तोड़फोड़ शुरू कर दी है। पूर्व विधायक विनोद हरित भी अपने व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में निर्धारित सेटबैक छोड़ने के लिए निर्माण हटवा रहे हैं। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। आवास विकास परिषद की सील खुलने के बाद भवन स्वामी और दुकानदार सामान निकालने के साथ अवैध निर्माण स्वयं हटाने में जुट गए हैं। परिषद ने 44 संपत्तियों को निर्धारित मानकों के अनुसार ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। कई भवनों में रविवार को ड्रिल मशीन और हथौड़ों से तोड़फोड़ का काम चलता रहा, जबकि कुछ संपत्ति स्वामियों ने खुद ही निर्माण हटाना शुरू कर दिया। वहीं, सेंट्रल मार्केट में प्रभावित महिलाओं का धरना 100 दिन से अधिक समय से जारी है। प्रदर्शनकारी रोजगार और वैकल्पिक आवास की मांग पर अड़े हैं, जबकि व्यापारी इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सलाहकार के समक्ष उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
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