नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर मोदी सरकार राजनीतिक और कानूनी दबाव में घिर गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत पूरे विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जबकि पुलिस कार्रवाई के बाद दर्ज मुकदमों और मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पर भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। संसद में प्रियंका गांधी के सरकार पर हमले लगातार जारी हैं। इतना ही नहीं प्रियंका गांधी उन मीडिया हाउस के रिपोटरों को भी आड़े हाथों ले रही हैं जो सरकार की बीन पर नाचने के लिए बदनाम हैं।
जंतर मंतर पर बच्चों से पुलिसिया बर्बरता से दिल्ली हाईकोर्ट सख्त नाराज है। पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। साथ ही सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का हुकूम जारी करते हुए कहा कि दिल्ली की घटना अकेली नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। इस मामले पर अब अगली सुनवाई अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।
दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप
जंतर मंतर की घटना को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर हिंसा मामले में कोर्ट में झूठ बोल रही है। उनका दावा है कि पुलिस ने लाठीचार्ज, डिटेंशन और निगरानी जैसी गंभीर घटनाओं पर तथ्यों को छुपाया है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के वकीलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए याचिकाओं को केवल पब्लिसिटी पाने का जरिया बताया है। 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर ‘चलो संसद मार्च’ के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस मामले में दिल्ली पुलिस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और आंतरिक जांच दस्तावेजों के अनुसार, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ डीसीपी के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाई गई थी, हालांकि पुलिस ने पहले इससे इनकार किया था। पहले इंकार और अब स्वीकार किए जाने ने संसद में सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। सोशल मीडिया पर तमाम ऐसे वीडियो फुटेज हैं जो हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस के लिए संकट का कारण बनने तय माने जा रहे हैं।
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