पेपर लीक विरोधी आंदोलन की तर्ज पर आंदोलकर सरकार को झुकाने पर दिया जा रहा है जोर, मगर पहल करे कौन
मेरठ। सेंट्रल मार्केट पर जंतर मंतर आंदोलन की छाया साफ नजर आ रही है। शास्त्रीनगर के आंदोलनकारी जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के रंग में रंगे हुए और प्रभावित भी नजर आते हैं। अब जंतर मंतर की तर्ज पर आंदोलन कर अपने आशियानों को बचाने की बात करने लगे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही कि पहल कौन करे। 90 फीसदी लोग पूरी तरह से सीजेपी और युवाओं के पक्ष में बातें कर रहे हैं। उनकी तर्ज पर कदम उठाने को भी कह रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल की पहल कौन करे। उनका कहना है कि सरकार झुकती है या साफ हो गया है, लेकिन उसके लिस सरकार को झुकाने वाला चाहिए। वहीं दूसरी ओर आवास विकास परिषद ने 44 सील संपत्तियों के ध्वस्तीकरण की उल्टी गिनती शुरू कर दी है। इस बीच चर्चा है कि जो कुछ चल रहा है वह भाजपा से जुड़े शहर के किसी बिल्डर के इशारे पर चल रहा है। यह भी सुनने में आ रहा है कि आवास विकास परिषद की सारी रजिस्ट्री जमा कर रही है और आवंटियों का ऑफर दिया जा रहा है कि जमीन उसे दे दी जाए इस जमीन पर बिल्डर उन्हें नया भवन बनाकर देंगे। हालांकि इसकी कोई पुष्टि करने को तैयार नहीं लेकिन यह बात पुरजोर तरीके से सुनने में आ रही है। वहीं दूसरी ओर ख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी का 27 जुलाई को फिर मेरठ आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस बैठक में व्यापारियों की मांगों और परिषद के प्रस्तावों पर समीक्षा की जाएगी।
ये हो रहा वायरल
जो सोशल मीडिया पर वायरल है उसको बगैर एडिट किए जस का तस दिया जा रहा है:- सार यह है कि सत्य को ज्यादा दिन छुपाया नहीं जा सकता कोई डाकू कितना ही साधु संत का चोला पहन ले लेकिन एक दिन उसकी असलियत सामने आ ही जाती है और चोला उतर जाता है आवास विकास और उसके साथियों का पूरे सिंडिकेट का चोला उतर चुका है और अब बात पूरी तरह सामने आ चुकी है साफ-साफ उनका प्रस्ताव है कि अपनी जमीन उन्हें दे दो वो बड़े-बड़े कमर्शियल मॉल बनाएंगे बड़े-बड़े यहां ग्रुप हाउसिंग बनाएंगे अपने बड़े बिल्डर साथियों को देंगे और करोड़ों रुपए कमा के अपना घर भरेंगे अपने रिश्तेदारों को अलॉट करेंगे अपनी घरवाली के लिए एक कुंटल सोने के जेवर बनवाएंगे बच्चों को विदेशों में पढ़ाएंगेऔर हमारे बच्चों को सड़क पर लाकर खड़ा करेंगे वह दर दर के ठोकर खाएंगे भीख मांगेंगे बेरोजगारी और गरीबी से सारी उम्र अंतिम सांस तक रोएंगे तड़पेंगे पूरा जीवन जिन्होंने अपना बाजार बनाने में लगा दिया आज 50 और 60 साल की उम्र में वह बेरोजगार हो जाएंगे कहां से रोटी खाएंगेक्या अभी भी कुछ समझना बाकी है मेरे पढ़े लिखे बोले भले भाइयों
शास्त्रीनगर प्रकरण की 14 जुलाई को सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई हुई थी। 8 अप्रैल को आवास एवं विकास परिषद ने आवासीय भवनों में पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां चलने पर 44 संपत्तियों को सील कर दिया था। इन संपत्तियों में स्कूल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, बैंक्वेट हॉल, मिष्ठान भंडार, जिम और शोरूम भी संचालित हो रहे थे। सुप्रीमकोर्ट ने सभी 44 सील संपत्तियां ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। आदेश के बाद उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने प्रभावित दुकानदारों और आवंटियों के साथ बैठक की। इसके बाद सील खोलकर हर संपत्ति का सर्वे कराया गया। इसमें स्वीकृत निर्माण, अवैध निर्माण और संपत्ति मालिकों की जानकारी जुटाई गई। सर्वे पूरा होने के बाद सभी संपत्तियों को फिर से सील कर दिया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
ताकि ना हो संपत्ति का विवाद
उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने ध्वस्तीकरण के बाद किसी तरह का स्वामित्व विवाद न हो, इसलिए सभी दुकानदारों और संपत्ति मालिकों से जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। अधिकांश लोगों ने अपने दस्तावेज जमा भी कर दिए हैं। परिषद की ओर से लगाए गए नोटिस में पहले जारी किए गए सभी नोटिसों का भी उल्लेख किया गया है।
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