साहब! निगम अफसर पार्षदों की कॉल तक नहीं करते रिसीव
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मेरठ। नगर निगम स्थित नगरायुक्त कार्यालय में आज उस वक्त सनसनी फैल गयी जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी की ओर मुखातिब होकर नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने नाराजगी भरे लहजे में कहा तो फिर क्यों ना सुपरवाइजर को ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी बना दिया जाए। नगरायुक्त की इस बात का नगर स्वास्थ्य अधिकारी अमन सिंह अवाना के पास कोई उत्तर नहीं था। वह निरूत्तर हो गए। हालांकि मौके की नजाकत को भांपते हुए नगरायुक्त ने माहौल को तुरंत हल्का कर दिया और कहा कि जो भी कॉल आए उसको रिसीव किया जाए। खासतौर से निर्वाचित जनप्रतितिधियों की फोन कॉल्स का खासतौर से ध्यान रखा जाए।
ये हुआ
मंगलावार को दोपहर करीब डेढ़ बजे नगरायुक्त सौरभ गंगवार अपने कक्ष में लोगों से मिल रहे थे। मिलने वालों में तमाम पार्षद भी मौजूद थे। ज्यादतर शिकायतें साफ सफाई को लेकर ही थीं। इस मौके पर अपर नगरायुक्त पंकज यादव और नगर स्वास्थ्य अधिकारी भी मौजूद थे। नगर निगूम के वार्ड 34 से पार्षद राजकुमार मांगलिक अपने वार्ड की समस्याओं को नगरायुक्त को बता रहे थे। उनकी मूल शिकायत उनके वार्ड की गलियों की सफाई की ना कराए जाने को लेकर थी। उन्होंने बताया कि केवल मेन रोड जिससे तीन वार्ड अटैच हैं उसकी तो सफाई की जाती है बाकि उनके वार्ड की गलियों में कभी भी सफाई नहीं करायी जाती है। वह कहते-कहते थक चुके हैं। उन्होंने शिकायत की कि इसकी जानकारी वह पूर्व में भी आज भी सीवर प्रभारी अपर नगरायुक्त को भी दे चुके हैं और नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भी बता चुके हैं। उन्होंने नगरायुक्त को उलाहना दिया कि वह भी जब निरीक्षण के लिए आते हैं तो केवल मुख्य मार्ग तक ही घूम कर चले जाते हैं कभी गलियों का मुआयना नहीं करते।
राजकुमार मांगलिक का कहना था कि गलियों में सफाई व्यवस्था दुरूस्त ना होने तथा उनके वार्ड में डलाव घर ना होने की वजह से लोगों ने उसका जीना दुश्वार कर दिया है। दिन की शुरूआत लोग अपनी गलियों में साफ सफाई ना कराए जाने की शिकायत से करते हैं। उन्होंने कहा कि जहां पहले कचरा डाला जाता था वो जगह बंद करा दी गयी। उन्होंने नगरायुक्त से वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कचरा गाड़ी लगाए जाने की बात कही। वहां मौजूद अपर नगरायुक्त का कहना था कि जल्द ही व्यवस्था कर दी जाएगी। जहां तक नालियों की सफाई की बात है तो एक दो दिन में मशीन दूसरे वार्ड से मंगा कर उनके वार्ड में लगा दी जाएगी। भाजपा पार्षद राजकुमार मांगलिक के पास आज शिकायतों की पूरी पोटली थी जो उनको नगराुयक्त के सामने खोल कर रख दी।
निर्वाचित पार्षद ने नगरायुक्त को बताया कि साफ-सफाई की समस्या का समाधान ना होने पर पब्लिक पार्षद को घेरती और पार्षद के पास केवल निगम अफसरों का सहारा होता है लेकिन जब नगर निगम के अफसर खासतौर से नगर स्वास्थ्य अधिकारी ही कॉल रिसीव ना करें और अपना सीयूजी मोबाइल भी सुपरवाइजर को दे दें तो बताए किससे फिर बात की जाए। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का सीयूजी सुपरवाइजर पर होने की बात सुनकर नगरायुक्त का पारा चढ़ गया। उन्होंने इसको गलत भी बताया और एनएसए से दो टूक कह दिया कि यह उचित नहीं जब सीयूजी सुपरवाइजर यूज कर रहा है तो फिर उसकी को क्यों ना एनएसए बना दिया जाए। इतना सुनते ही अमर सिंह अवाना का चेहरा उतर गया। उनके पास नगरायुक्त की बात का कोई उत्तर नहीं था। उन्होंने एहतराम किया कि हां सुपरवाइजर पर सीयूजी का रहना मुनासिबत नहीं और आइंदा सीयूजी पर आने वाले कॉल वह स्वयं रिसीव करेंगे।
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