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अमेरिका पीछे हटा जंग बंद करने का एलान

अमेरिका पीछे हटा जंग बंद करने का एलान

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अमेरिका पीछे हटा जंग बंद करने का एलान
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नई दिल्ली। 2026 में अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव और हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद, अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया है कि ईरान के साथ मुख्य युद्ध “समाप्त” हो गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने युद्ध विरोधी आवाज़ों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ लड़ाई को “दुनिया के लिए एक उपहार” और “निर्णायक सैन्य सफलता” बताया है। हालांकि यह नहीं बताया जा रहा है कि जिस लड़ाई में अमेरिका ने अरबों डालर फूंक दिए उससे क्या हासिल हो पाया और जिस परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने का दावा अमेरिका कर रहा है उन दावों में कितनी सच्चाई है। क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक दिन पहले ही कहा है कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिकी या किसी के भी दबाव में अपना एटमी प्रोग्राम नहीं छोड़ने जा रहा है। एटमी प्रोग्राम पूरी तरह से शांति पूर्ण है। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने ईरान युद्ध की आलोचना करने वाले अमेरिकी सांसदों (विशेषकर डेमोक्रेट्स) को “सबसे बड़ा विरोधी” करार दिया है। उनका तर्क है कि आंतरिक आलोचना और “गैर-जिम्मेदार बयान” युद्ध के प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं। हेगसेथ तमाम डेमोक्रेट्स सांसदों ने खासे नाराज दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन के अफसरों और मंत्रियों यहां तक कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ पूरे अमेरिका में युद्ध विरोधियों में जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है।

ट्रंप नहीं खुलवा सके स्ट्रेट हाेर्मूज

लड़ाई के नाम पर अबरों डालर खत्म करने के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति ईरान को स्ट्रेट हाेर्मूज खुलने के लिए राजी नहीं कर सके। स्ट्रेट होर्मूज इस वक्त अमेरिकी मिसाइलों की निगरानी में है। ईरानी केवल उन्हीं कारगोशिप को गुतरने दे रहे हैं जो भारी भरकम टोल भर रहा है, बाकियो को डूबा दिया जा रहा है। हालांकि इस दौरान एक बार अमेरिकियों और ईरानी कमांडरों के बीच जबदस्त झड़प भी हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि लड़ाई खत्म हो गयी है तो क्या अब यूएस की नेवी वापस लौटेगी या फिर हिन्द महासागर में मौजूदगी बनी रहेगी। ईरानी बंदरगाहों को खुले जाने पर कोई तस्वीर साफ नहीं की जा सकी है। अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक सांसदों ने युद्ध के लिए आवश्यक अनुमोदन (authorization) और युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव (War Powers Resolution) के उल्लंघन पर सवाल उठाए हैं। ईरान पर अमेरिका और उसके मित्र देश इजरायल समेत खाडी के कई देशों ने मिलकर हमला बोला था। यह हमला बातचीत के दौरान 28 अफरवरी को अचानक कर दिया गया था।
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