Home Delhi चुनाव आयोग को हाईकोर्ट की फटकार
Delhi

चुनाव आयोग को हाईकोर्ट की फटकार

चुनाव आयोग को हाईकोर्ट की फटकार

Share
चुनाव आयोग को हाईकोर्ट की फटकार
Share
नई दिल्ली। पश्चिम बंगल में भाजपा को खुश करने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे चुनाव आयोग को कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगायी है औरक हा है कि अधिकार होने का अर्थ यह नहीं कि कुछ भी आदेश जारी कर दिए जाएंगे. हाईकोर्ट ने कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में मोटरबाइकों पर 48 घंटे की पाबंदी लगाने के आदेश को तुगलकी फरमान करार देते हुए इसे नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताया. गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए कहा कि सिर्फ अधिकार होना किसी भी तरह के आदेश लागू करने का आधार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि अगर आप सब कुछ बंद करना चाहते हैं तो आपातकाल घोषित कर दीजिए, लेकिन इस तरह नागरिकों के अधिकारों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता. इससे पहले बुधवार को भी हाईकोर्ट ने चुनाव को झटका दिया था. उसने राज्य में आयोग की ओर से करीब 800 लोगों को उपद्रवी करार देने के फैसले को पटल दिया था.

चुनाव करा रहे हैं या बॉर्डर पार

चुनाव आयोग ने 21 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर 27 अप्रैल शाम 6 बजे से 29 अप्रैल तक मोटरसाइकिलों के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया था. आदेश के अनुसार इस दौरान बाइक केवल सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही चलाई जा सकती थी. इसके अलावा पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) और बाइक रैलियों पर भी रोक लगा दी गई थी. हालांकि मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक कार्यक्रम और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई थी.

बैकफुट पर चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा थाकि यह कदम स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने तथा किसी भी तरह की हिंसा, डराने-धमकाने या अवांछित घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है. आयोग का मानना था कि इस तरह के प्रतिबंध से मतदान का माहौल बेहतर और सुरक्षित बनेगा. लेकिन, अदालत इस तर्क से संतुष्ट नहीं था. जस्टिस राव ने सुनवाई के दौरान आयोग के वकील से सवाल किया कि क्या अन्य राज्यों में भी इस तरह के आदेश जारी किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि आपके पास पुलिस व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे हैं, फिर इतनी कड़ी पाबंदी की जरूरत क्यों? यह एक असंगत प्रयास है जिससे सब कुछ ठप करने की कोशिश हो रही है.

पूछ लिए पांच साल में कितने दर्ज किए मामले

अदालत ने यह भी पूछा कि पिछले पांच वर्षों में मोटरसाइकिल चालकों के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए हैं, जिससे यह साबित हो सके कि ऐसा प्रतिबंध आवश्यक था. साथ ही आयोग को निर्देश दिया गया कि वह शुक्रवार तक शपथपत्र दाखिल कर इस फैसले के पीछे की ठोस वजह बताए. अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, न कि आम जनता पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाकर समस्या का समाधान किया जाए.
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

19 − 15 =

Related Articles

गर्मी से मिलेगी राहत आंधी के साथ आएगी बारिश

गर्मी से मिलेगी राहत आंधी के साथ आएगी बारिश

बैंक ना जाए काम ऑन लाइन निपटाएं

बैंक ना जाए काम ऑन लाइन निपटाएं

आप के संजय सिंह का पीएम मोदी पर बड़ा हमला

आप के संजय का पीएम मोदी पर बड़ा हमला

‘ट्रांज़िट ऑफ़ गुड्स थ्रू पाकिस्तान’

'ट्रांज़िट ऑफ़ गुड्स थ्रू पाकिस्तान'