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पानी के लिए 42 की मौत

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पानी के लिए 42 की मौत
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नई दिल्ली। पानी के लिए दुनिया के पूर्वी चांड इलाके में दो कबिलों में मची मारकाट में 42 लोग मारे गए। इस लड़ाई को रोकनक के लिए सेना का सहारा लेना पड़ा। यह इलाका सूडान सीमा के पास वादी फिरा प्रांत में मौजूद है। जहां शनिवार को पानी के लिए अचानक हिंसा शुरू हो गयी और सोमवार तक इस हिंसा में 42 की मौत हो गयी। इलाके में सेना की तैनात कर दी गयी है। यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब चाड को पड़ोसी सूडान में चल रहे युद्ध से बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। पूर्वी प्रांतों ने संघर्ष से भाग रहे लाखों शरणार्थियों को शरण दी है, जिससे पहले से ही सीमित संसाधनों पर और अधिक दबाव पड़ रहा है। फरवरी में, चाड ने सूडान के साथ अपनी सीमा को “अगले आदेश तक” बंद कर दिया, जिसमें लड़ाकों के उसके क्षेत्र में घुसपैठ करने और संघर्ष के फैलने के खतरे के बारे में चिंताओं का हवाला दिया गया था।

आने वाले कल की भयानक तस्वीर

चार लाइन की यह खबर महज खबर भर नहीं है बल्कि उस हालात की ओर से इशारा कर रही है जब दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। दुनिया में पानी की बेजा कमी होने जा रह है। पानी की बर्बादी की जब बात आएगी और इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें सबसे बुरे भारतीय होंगे। भारत के लोगों में आज भी पानी को लेकर पानी बचाने को लेकर सहूर नहीं है। भारत के लोग पानी को बर्बाद करने के मामले में पूरी दुनिया में बदनाम है। खासतौस से उत्तर भारत के लाेग सबसे ज्यादा बदनाम है।

भारत की तस्वीर

भारत में पानी की बर्बादी एक गंभीर समस्या है, जहाँ प्रतिदिन करीब 49 अरब लीटर पानी बर्बाद कर दिया जाता है। यह कुल दैनिक उपयोग का लगभग 30% है। कृषि, औद्योगिक और घरेलू स्तर पर कुप्रबंधन, जैसे कि नल खुला छोड़ना, पाइपलाइन में रिसाव और पानी का अत्यधिक उपयोग मुख्य कारण हैं। यह बर्बादी 2030 तक 60 करोड़ भारतीयों के लिए पानी की गंभीर किल्लत पैदा कर सकती है।

पानी बर्बादी के तरीके

बसे ज्यादा पानी नहाने, ब्रश करने और खुले नलों से बर्बाद होता है। इसके अलावा, पाइपलाइन में रिसाव और पुराने घरेलू फिटिंग से भी पानी की बहुत बर्बादी होती है।पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर और सॉफ्ट ड्रिंक उद्योग भी भूजल का भारी मात्रा में दोहन करते हैं, जो पानी की बर्बादी का एक बड़ा कारण है।  पानी को बचाने के लिए नलों को कस कर बंद करें, बाल्टी का उपयोग करें, और रेनवाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) को अपनाएं।
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