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सीजफायर टूटा तो होगा भारी रक्तपात

सीजफायर टूटा तो होगा भारी रक्तपात

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सीजफायर टूटा तो होगा भारी रक्तपात
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नई दिल्ली/तेहरान। सीजफायर के बावजूद आम ईरानी नागरिक यूएस के राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा नहीं कर पा रहा है। दुनिया के कई दूसरे देशों का मानना है कि ट्रंप सीजफायर तोड़ने व भड़काने पर अमादा नजर आते हैं। उनकी भाषा और बॉडी लेग्वेज सीजफायर के पीछे उनके छिपे चहरे को उजागर कर रही है। यह भी माना जा रहा है कि ट्रंप दरअसल इजरायल के प्रेशर में हैं जो नहीं चाहता था कि सीज फायर हो, लेकिन युद्ध में फंसे डोनाल्ड ट्रंप के पास सीज फायर के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचा था। ईरानी रेवल्यूशनरी कमांडर भी यूएस की हर चाल पपर नजर रखे हें, इसलिए ईरानी आर्मी अभी बैरकों में नहीं भेजी जा रही है। तेहरान में रहने वाले कई ईरानियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका की लगातार धमकियों और पूरे क्षेत्र में इजरायल के चल रहे सैन्य अभियान की छाया में कूटनीति टिक सकती है।

लेबनान पर हमले के बाद हालात तनावपूर्ण

सीजफायर के चंद घंटे बाद ही इजरायल के लेबनान पर हमलों में तीन सौ की मौत के बाद हालात तनाव पूर्ण है। इससे ईरानी बेहद नाराज हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी का इजहार भी कर दिया है। इजरायल भी जानता है कि यह सीजफायर टिकने वाला नहीं है। माना जा रहा है कि इसी के चलते उसने हवाई हमलों में तीन सौ बेगुनाह लेबनानी नागरिकों की हत्या कर डाली।

डोनाल्ड ट्रंप की घेराबंदी की तैयारी

इस बीच, अमेरिका में युद्ध का विरोध बढ़ता जा रहा है। सीनेटर कोरी बुकर ने कहा कि डेमोक्रेट अनधिकृत सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाने के लिए युद्ध शक्ति प्रस्ताव के तहत मतदान कराने की कोशिश करेंगे। बुकर ने कहा, “ट्रम्प की अनधिकृत सैन्य कार्रवाइयां और लापरवाह युद्ध भड़काने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए।””अमेरिकी जनता इस युद्ध को नहीं चाहती और न ही उन्होंने इसे अधिकृत किया है, लेकिन फिर भी वे इसकी कीमत चुकाते रहते हैं।”

ट्रंप की उकसावे की कार्रवाईयां

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना ईरान के आसपास तैनात रहेगी और अगर तेहरान वाशिंगटन की मांगों को पूरा करने में विफल रहता है तो भारी सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे नाजुक सीजफायर पर संदेह पैदा हो गया है । देर रात सोशल मीडिया पर लिखते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिक, विमान और नौसेना बल तब तक अपनी स्थिति में बने रहेंगे जब तक कि उनके द्वारा वर्णित “वास्तविक समझौता” पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता। इस सीज फायर के बाद से ट्रंप लगातार उकसावे वाले बयान दे रहे हैं। शायद वह बता रहे हैं कि सीजफायर से इजरायल खुश नहीं, इसलिए सीजफायर तोड़ना ही होगा।

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