रोहटा रोड स्थित शोभापुर निवासी अबरीशा खातून की याचिका पर हाईकोर्ट का केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस, नगर निगम के रुख पर दोबारा याचिका, छह प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब तलब
नई दिल्ली/इलाहाबाद/मेरठ। कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद अजमेर अली की पत्नी अबरीशा खातून को खेती के लिए 25 बीघा जमीन आवंटित किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार सहित छह प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 7 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में प्रतिवादी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
ये है पूरा मामला
अजमेर अली वर्ष 1987 में सेना में आर्मी सैपर ऑपरेटर के रूप में लेह-लद्दाख में तैनात थे। वहां शून्य से नीचे तापमान और बर्फीली हवाओं जैसी कठिन परिस्थितियों में वे बर्फ हटाने के कार्य में लगे थे। इसी दौरान ऑपरेशन के समय वे डोजर के साथ हिमस्खलन की चपेट में आ गए और शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस और बलिदान के सम्मान में राष्ट्रपति ने 22 मार्च 1987 को उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था।
जमीन आवंटन की मांग
शहीद की पत्नी अबरीशा खातून के पास खेती के लिए जमीन नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से 25 बीघा जमीन आवंटित किए जाने की मांग की थी। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी, मेरठ ने भी उनकी मांग का समर्थन किया था। इसके बावजूद जमीन आवंटन का मामला आगे नहीं बढ़ सका। रोहटा रोड स्थित शोभापुर निवासी अबरीशा खातून ने इससे पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस पर न्यायालय ने नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनके प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, नगर निगम ने उनके प्रत्यावेदन पर अपेक्षित निर्णय लेने के बजाय यह कहा कि जमीन का आवंटन राज्य सरकार एवं राजस्व विभाग के स्तर से किया जाएगा। इसके बाद अबरीशा खातून ने अपने अधिवक्ता सुनील चौधरी के माध्यम से पुनः हाईकोर्ट की शरण ली। रिट-सी संख्या 38962/2026, अबरीशा खातून बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं पांच अन्य की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने पक्ष रखा।
18 नवंबर को होगी अगली कार्रवाई
हाईकोर्ट ने प्रतिवादी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का अवसर मिलेगा। न्यायालय ने मामले को 18 नवंबर 2026 को रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रार को पक्षकारों के बीच अभिवचनों का आदान-प्रदान सुनिश्चित कर मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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