मेरठ। महानगर की सस्ता गल्ला राशन की दुकानों पर ना केवल घटिया डिटर्जेन्ट पाउडर, साबुन, मसाला व मीट मसाला बिकवाया जा रहा है, बल्कि योगी सरकार के खजाने को राजस्व का चूना लगाने के लिए जीएसटी के कायदे कानूनों का भी खुला उल्लंघन किया जा रहा है। आरोप है कि यह सारा खेल आपूर्ति विभाग के दो एआरओ और कानपुर की काशी विश्वनाथ इंडस्ट्रीज मिलकर कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत आरटीआई एक्टिवस्ट अर्चित गुप्ता ने सीएम योगी, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, सहायक आयुक्त, राज्यकर विभाग और
सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भेजी है। इस मामले के सामने आने के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
यह है पूरा मामला
सीएम योगी को भेजे गए अपने पत्र में इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए अर्चित गुप्ता ने अवगत कराया है कि कानपुर की फर्म काशी विश्वनाथ इण्डस्ट्रीज द्वारा मेरठ जनपद में अपने होल सेलर्स के साथ मिलकर जीएसटी नियमों का उल्लंघन कर सरकारी खजाने को करोड़ों के राजस्व का फटका लग रही है। इसके इतर इस कंपनी ने खुद करोड़ों रूपये के इस कारोबार के लिए अति आवश्य व अनिवार्य खाद्य पदार्थों की बिक्री करने के उपरान्त भी एफएएसएआई का भी होल सेलर्स लाईसेंस नहीं बनवाया गया है। पत्र में सीएम योगी को अवगत कराया गया है कि इसी तरह जनपद की प्रत्येक तहसील में ब्लॉक स्तर पर थोक विक्रेता बनाये गये है, किसी के पास भी न तो जीएसटी का पंजीकरण है और न ही एफएसएसएआई का लाईसेन्स है। इस कारगुजारी से काशी विश्वनाथ इण्डस्ट्रीज व इसके थोक विक्रेताओं द्वारा प्रदेश सरकार को भारी भरकम राजस्व की हानि पहुंचाई जा रही है। साथ ही एक्सपायर्ड माल बेचकर जनता की जान से खिलवाड़ भी किया जा रहा है। पत्र में सीएम योगी का यह भी अवगत कराया गया है कि कम्पनी के मेरठ महानगर के थोक विक्रेताओं में शादाब खुद भी पूर्वा इलाही बक्श का राशन डीलर है व दूसरा थोक विक्रेता अर्पित मौहल्ला श्याम नगर में अपनी मां सुनीता गुप्ता के नाम से राशन की दुकान चलाता है और एक तीसरा थोक विक्रेता जतिन नाम का व्यक्ति भी किसी राशन डीलर का नातेदार बताया जाता है ।
इसी तरह जनपद की प्रत्येक तहसील में ब्लॉक स्तर पर थोक विक्रेता बनाये गये है, किसी के पास भी न तो जीएसटी का पंजीकरण है और न ही एफएसएसएआई का लाईसेन्स है। आरोप है कि कानपुर की यह कंपनी केवल घटिया सामग्री बिकवाकर ना केवल लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है बल्कि योगी सरकार को भी राजस्व का चूना लगा रही है। इस सारे खेल में जिला आपूर्ति विभाग के दो एआरओ की भूमिका की बात कहते हुए अर्चित गुप्ता ने उनकी भी जांच कराए जाने का आग्रह सीएम योगी से किया है।
उपभोक्ताओं को किया जाता बाध्य
शिकायती पत्र में बताया गया है कि माह अगस्त 2026 में राशन डीलर्स द्वारा राशन कार्डधारकों को जबरन कुछ सामान की बिक्री की जा रही है, जिसकी कीमत 100/-रू0 वसूली जा रही है जिसमें डिटर्जेन्ट पाउडर, साबुन, मसाला आदि है, जिनकी क्वालिटी भी खराब है यहां तक कि इस किट में मीट मसाले की भी बिक्री करवायी जा रही है, जिसका हर व्यक्ति प्रयोग नहीं करता है और सबसे अधिक पत्तिजनक यह है कि यह मीट मसाला एक्सपायर्ड है जोकि जनता की सेहत से सरासर खिलवाड़ है जो कार्डधारक इस सामान की किट को लेने से मना करता है उसे राशन न देने व कार्ड काटने की धमकी दी जाती है । यद्यपि शासनादेशानुसार राशन डीलर्स कुछ सामानों की बिक्री कर सकते हैं परन्तु राशन कार्ड डीलर्स को इन वस्तुओं को खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता अगर राशन डीलर्स ऐसा करते हैं तो यह दण्डनीय है। जिला पूर्ति अधिकारी मेरठ द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया गया है कि कोई भी राशन डीलर जबरदस्ती किसी सामान की बिक्री नहीं कर सकता है। मामले की जांच कराकर कसूरवाराें पर कठोर कार्रवाई का आग्रह सीएम योगी से किया गया है।
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