नई दिल्ली। अमेरिका में इस साल माह नवंबर में होने जा रहे मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक साख पूरी तरह से दांव पर लगी है। अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में यह माना जाता है कि मध्यावधि चुनाव सीधे तौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज और उनकी नीतियों पर जनता का जनमत संग्रह (referendum) होते हैं। यदि इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—में अपना नियंत्रण खो देती है, तो ट्रंप अपने कार्यकाल के बाकी बचे दो वर्षों में पूरी तरह ‘लेम डक’ (शक्तिहीन) राष्ट्रपति बनकर रह जाएंगे। वे अपनी पसंद की नीतियां, बजट और न्यायधीशों की नियुक्तियां आसानी से नहीं कर पाएंगे। रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप का एकछत्र नियंत्रण है। इस चुनाव में उन्होंने खुद 32 दिनों का सघन चुनावी अभियान शुरू किया है और कई उम्मीदवारों को व्यक्तिगत रूप से समर्थन दिया है। पार्टी की हार सीधे तौर पर ट्रंप की व्यक्तिगत हार मानी जाएगी
अग्नि परीक्षा से होगा गुजरना
इन चुनावों को ट्रंप के लिए अग्नि परीक्षा से गुजरना सरीखा माना जा रहा है। महंगाई, बढ़ती दैनिक लागतों और ईंधन की कीमतों को लेकर आम अमेरिकी जनता में जो असंतोष है, वह सीधे तौर पर ट्रंप की लोकप्रियता की परीक्षा लेगा। अगर रिपब्लिकन पार्टी हारती है, तो इसे ट्रंप की आर्थिक नीतियों की नाकामी माना जाएगा। ट्रंप ने मतदाताओं को लुभाने के लिए $5,000 के ‘ट्रंप डिविडेंड’ का जो बड़ा दांव खेला है, उस पर जनता का फैसला उनकी साख तय करेगा। यदि जनता इस वादे को नकार देती है, तो यह ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के कमजोर होने का बड़ा संकेत होगा।
बहुमत का संकट
रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में अपने बेहद कमजोर और नाजुक बहुमत को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। यदि रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण खो देती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए अपनी नीतियों और कानूनों को लागू करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे प्राइमन्यूज लाइव और यूट्यूब रिपोर्ट्स) के मुताबिक, इस समय चुनाव में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। आम अमेरिकी नागरिक दैनिक जीवन की लागत, जैसे—किराना, पेट्रोल, डीजल, मकान किराया, बिजली और बीमा की बढ़ती कीमतों से बेहद नाखुश हैं। अर्थव्यवस्था को लेकर जनता का यह असंतोष ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा राजनीतिक खतरा बना हुआ है।
पांच हजार डालर में वोट
चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ट्रंप ने सितंबर 2026 में घोषणा की थी कि अगर रिपब्लिकन पार्टी जीतती है, तो प्रत्येक अमेरिकी वयस्क को $5,000 (लगभग 4.2 लाख रुपये) का ‘ट्रंप डिविडेंड’ दिया जाएगा। इस मुफ्त उपहार के वादे के बाद विपक्ष उन पर वोट खरीदने और रिश्वतखोरी के आरोप लगा रहा है। इस वादे को लेकर खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी असहज दिखे और उन्होंने इसमें संशोधन करने की कोशिश की, जिससे प्रशासन की चुनावी घबराहट सामने आई है।
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