Home Delhi सरकारी दफ्तरों में रखी जा रही हैं लाशें
Delhi

सरकारी दफ्तरों में रखी जा रही हैं लाशें

सरकारी दफ्तरों में रखी जा रही हैं लाशें

Share
सरकारी दफ्तरों में रखी जा रही हैं लाशें
Share

नेपाल में अब लाशों को रखने के लिए जगह तक नहीं है बची, हजारों की संख्या में लोग हैं लापता

नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अस्पतालों के शवगृह (मोर्चरी) पूरी तरह भर गए हैं, जिसके चलते कुछ जगहों पर सरकारी इमारतों और औद्योगिक केंद्रों का उपयोग अस्थायी रूप से शव रखने के लिए करना पड़ा है। नेपाल में भोटेकोशी नदी और अन्य सहायक नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ (Flash Floods) के कारण हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जिसके कारण नेपाल के अस्तपालों और मुर्दाघरों में लाशे तक रखने की जगह बाकि नहीं हैं। हर तरफ लाशें ही लाशें बिखरी पड़ी हैं। हालात यह हो गयी है कि परिवार वालों ने भी लाशें उठाने से मना कर दिया है। चितवन के मुख्य अस्पतालों में केवल 50 शव रखने की क्षमता है, जबकि वहां 178 से अधिक शव आ चुके हैं। पोखरा, धाडिंग, नुवाकोट और नवलपरासी के मुर्दाघर भी पूरी तरह भर चुके हैं। नेपाल की ‘नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (NDRRMA) के अनुसार, लापता लोगों की संख्या हजारों में है। इनमें स्थानीय लोगों के अलावा सैकड़ों विदेशी और भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, लगभग 320 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। सरकारी दफ्तरों में लाशें हालत कितनी खराब हो गयी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाशों को अब सरकारी दफ्तारों में रखा जा रहा है। आसपास लाशों से सडांध उठने लगी है। मुर्दाघरों में जगह न होने के कारण शवों को पड़ोसी जिलों और काठमांडू भेजा जा रहा है। चितवन और भरतपुर में खाली पड़ी सरकारी इमारतों को अस्थायी शवगृहों में बदला जा रहा है, जहां माइनस डिग्री तापमान बनाए रखने और शवों को व्यवस्थित रखने के लिए ‘डेकर’ तैयार किए गए हैं। कुछ जगहों पर तो शवों को सरकारी दफ्तरों में रखना पड़ा है।

महामारी सरीखे हालात

बाढ़ के पानी में बहकर आए शव सड़ने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। कई इलाकों में इनसे भारी दुर्गंध आने लगी है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय नियमों के तहत शवों की पहचान और सबूत जुटाए बिना उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता। इसके लिए नेपाल प्रशासन ने QR कोड सिस्टम और फोटोग्राफी की मदद ली है, ताकि बेबस परिवार अपने लापता सदस्यों की पहचान कर सकें।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

20 + 2 =

Related Articles

SSP को प्रिंस की धमकी पर कहां था पुलिस एसो.

SSP को प्रिंस की धमकी पर कहां था पुलिस एसो.

मोदी के मुकाबले राहुल ब्रांड में तब्दील

मोदी के मुकाबले राहुल ब्रांड में तब्दील

छात्रों को लेकर आमने सामने भाजपा कांग्रेस

छात्रों को लेकर आमने सामने भाजपा कांग्रेस

इस्तीफा देकर दलित मंत्री बोले भाजपा के मनुवाद का बना शिकार

इस्तीफा देकर दलित मंत्री बोले भाजपा के मनुवाद का बना शिकार