नई दिल्ली। ईरान व अमेरिका के बीच हुए समझौते को ठोकर मारकर इजरायल ने लेबनान पर भारी हमला किया है। वहां भीषण लड़ाई चल रही है। इसमें अब तक 18 लेबनानी मारे गए हैं। इस हमले से साबित हो गया है कि इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बात नहीं मानी और ईरान व यूएस के बीच हुए समझौते को ठोकर मार दी है। लेबनान पर किए गए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्वीर ने सोशल मीडिया पर लिखा: “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” एक और मंत्री बेज़लेल स्टमक ने इज़राइल से “नरक के द्वार खोलने” को कहा है।
हवाई हमलों में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं, जो इजरायली सेना के अनुसार अभी भी जारी हैं। खबरों के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में “तीव्र लड़ाई” के बीच इजरायली सेना ने हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए। इजरायली सेना ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने रात भर दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और युद्ध विराम पर भारी खतरे के बाद भी इजराली सेना का यह महाअभियान बगैर किसी रोकटोक जारी है। कई न्यूज ऐजेंसियों ने युद्ध विराम के उल्लंघन की खबरें जारी की हैं। इजरायल की सेना ने कहा कि उसने हिजबुल्लाह के 80 से अधिक ठिकानों पर हमला किया और उसके दर्जनों सदस्यों को मार गिराया, यह कार्रवाई उसने युद्धविराम उल्लंघन के रूप में देखी जा रही है।
इजरायल का कमांडर व चार फौजी भी हलाक
इस भीषण लड़ाई में इजरालय को भी नुकसान उठाना पड़ा है। इजरायली सेना ने यह भी बताया कि इस लड़ाई में एक बटालियन कमांडर सहित चार इजरायली सैनिक मारे गए हैं। युद्ध में आई तेज़ी के कारण अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के प्रयासों को लेकर स्विट्ज़रलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ता में देरी हो गई है। बताया गया है कि इज़राइल द्वारा लेबनान पर लगातार हमलों के चलते तेहरान ने अपनी ओर से वार्ता भेजने से इनकार कर दिया है। इजराइल का कहना है कि उसे हिजबुल्लाह से लड़ने के लिए अपने सैन्य अभियान जारी रखने होंगे, जिसमें हवाई हमले और दक्षिण में क्षेत्र पर कब्जा करना शामिल है।
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