मेरठ। महानगर के कई इलाके ऐसे हैं जहां रात में भले ही स्ट्रीट लाइट ना जलने की वजह से अंधेरा पसरा रहे, लेकिन इन इलाकों में अक्सर दिन के उजाले में स्ट्रीट लाइटें जरूर जलती हैं। नगर निगम के पथ प्रकाश अनुभाग का कहना है कि दिन में स्ट्रीट लाइट जलने और रात में बंद रहने की समस्या का मुख्य कारण ऑटोमैटिक स्विच में खराबी हो जाना है। कई इलाकों में नगर निगम और ठेकेदारों की लापरवाही से मरम्मत न होने के कारण रात में अंधेरा रहता है। यूं कहने को जब ऊर्जा संकट एक बड़ा खतरा है और अघोषित बिजली कटौती रोजमर्रा की बात हो गई है, तो शहर के कई हिस्सों में दिन के समय भी स्ट्रीट लाइटें जलती हुई देखी जा सकती हैं। स्ट्रीट लाइटों के संचालन पर नगर निगम के अधिकारियों का नियंत्रण है। संपर्क करने पर, नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि सुबह के समय लाइटों का जलना स्वचालित स्विचों में खराबी के कारण हो सकता है, जिन्हें दिन के दौरान लाइटें बंद करनी होती हैं। जब तकनीशियन दिन में लाइटों की वायरिंग या फॉल्ट ठीक करते हैं, तो अक्सर ट्रायल के तौर पर लाइटें जलाकर छोड़ दी जाती हैं। यह भी बताया गया है कि महानगर के कुछ इलाकों की स्ट्रीट लाइट को नगर निगम ने बीओटी के ठेकेदार के हवाले कर रखे हैं। ठेकेदार को इन मार्गो के डिवाइडर और स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव करना होता है। इनमें से तमाम ऐसे इलाके हैं जहां किन्हीं कारणों से स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। रात में अंधेरी सड़कों पर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं कई स्थान ऐसे भी हैं जहां दिनभर स्ट्रीट लाइटें जलती हैं।
हादसों की आशंका
जिन इलाकों में रात में स्ट्रीट लाइटें नहीं जलती हैं खासतौर से ऐसे इलाके जो शहर की घनी आबादी से दूर हैं या कह दें शहर का आउटर इलाका कहलाते हैं वहां स्ट्रीट लाइटे ना जलने की वजह से अक्सर हादसे होते हैं और छेड़खानी ओर लूटपाट सरीखी वारदातों की आशंका रहती है। लावड़ रोड और एनएच-58 का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जहां शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। स्ट्रीट लाइटें ना जलने की वजह से ही हादसे होते हैं।
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