नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका में हुए समझौते को अभी चंद घंटे हुए हैं और दुनिया भर में इस समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दुनिया भर के जानकारों का कहना है कि यह समझौता टिक पाएगा यह मुश्किल भरा लगाता है क्योंकि तेलअबीब इस समझौते की धज्जियां उड़ाने को बेताब है। ईरान की मुख्य शर्त लेबनान पर इजरायली हमलों का रोका जाना है और तेलअबीब इसके लिए बिलकुल भी तैयार नहीं। इजरायल बार-बार कह रहा है कि वह इस समझौते से बंधा नहीं है। इजरायली रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कहा है कि इसराइली सेना लेबनान में सुरक्षा क्षेत्रों में ‘अनिश्चितकाल तक’ बनी रहेगी और चेतावनी दी है कि यदि लेबनान को लेकर ईरान इसराइल पर हमला करता है तो वे ‘पूरी ताक़त से जवाब देंगे।’
ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते से चंद मिनट पहले इजरायल ने लेबनान पर भारी बमबारी कर अपने मंसूबों को जाहिर कर दिया है। इसराइली लड़ाकू विमानों ने नबातियेह अल-फ़ौका क्षेत्र और पड़ोसी कफ़र तेबनित के बाहरी इलाक़ों को निशाना बनाया।इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हालांकि लेबनान युद्धविराम ढांचे के अंतर्गत आता है, लेकिन लेबनानी क्षेत्र से इसराइली सेना की वापसी समझौते की शर्त नहीं है। उनका कहना है कि इसराइल को आत्मरक्षा का अधिकार बना रहेगा। ट्रंप प्रशासन भी मान रहा है कि इजरायल को राजी करना उनके बूते से बाहर की बात है। लेकिन ईरान का कहना है कि लेबनान में युद्ध का अंत ‘युद्ध समाप्त करने के समझौते का अभिन्न हिस्सा’ है।
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