मेरठ। आरटीआई एक्टिविस्ट ने डा. संदीप पहल ने झकझोरा तो सिस्टम नींद से जागा और आनन-फानन में जिला पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जे कर बनवायी गयीं सईद सज्जू की दुकानों को सिस्टम चलाने वालों ने ध्वस्त करा दिया। इससे यह बात तो साफ हो गयी कि यदि आम आदमी ठान ले तो सिस्टम को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाने में देरी नहीं लगती। वैसा ही कुछ डा. संदीप पहल ने किया और नतीजा सबके सामने हैं। जमीन पर कब्जा कर बनवायी गयीं सईद सज्जू जिसकी इमेज और पुलिस थाने में लिखा पढ़ी एक अपराधी वाली है उसकी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। सईद सज्जू का यह कोई पहला मामला नहीं है। जिला पंचायत की जमीन पर उसने पहले भी कब्जा कर करोड़ों कीमत का एक विवाह मंडप इसी इलाके में बना लिया है। उसका वो विवाह मंडप आज का नहीं बल्कि दशकों से चल रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि जिला पंचायत में कई अध्यक्ष आए और चले गए। मेरठ में कई कमिश्नर और डीएम तथा एसएसपी सरीखे अफसर आए और चले गए, लेकिन किसी भी ने भी आज तक इतनी जहमत नहीं उठायी कि सईद सज्जू ने जिला पंचायत की कितनी जमीनों पर कब्जे किए हैं। कौन इसके लिए जिम्मेदार हैं इसकी जांच करा सकें। हां इतना जरूर हुआ है कि आज पहली बार अफसरों को एक्शन लेते देखा है। यह बात अलग है कि यह एक्शन डा. संदीप पहल की वजह से हुआ है या फिर यूपी में इन दिनों जो चल रहा है उसी क्रम में इसको शुमार कर लिया जाए।
अफसरों पर कार्रवाई कब
जिला पंचायत की जमीन पर कब्जा कर सईद सज्जू द्वारा बनायी गयी बतायी जा रही मेन रोड की इन दुकानों को पहले सील किया गया फिर आज ध्वस्त कर दिया गया। अच्छी बात है लेकिन ये दुकानों या जिला पंचायत की जमीन पर कब्जा रातों रात नहीं हो गया। इसमें अरसा लगा है। जब यह सब चल रहा था तो जिला पंचायत के अफसर या जिला पंचायत संभालने वाले दूसरे जनता के नुमाइंदे क्या कर रहे थे। या यह मान लिया जाए कि हमाम में सभी नंगे थे।
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