नई दिल्ली/ जिसकी उम्मीद आमतौर पर नहीं की जाती थी भाजपा ने वो पश्चिम बंगाल में कर दिखाया। करीब ८२ साल बाद राज्य की राजनीति में हिन्दुत्व का तड़का लगा नतीजा सामने है। भाजपा को लगभग २०० सीटें मिलने की उम्मीद है। केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि आसाम, पांडेचेरी में भी पीएम मोदी के करिश्माई चुनाव प्रचार का जलवा नजर आया। इसके इतर तामिलनाडू में विजय थलापति की पार्टी ने पहले ही प्रयास में साबित कर दिया वो किसी से कम नहीं। थलापति की पार्टी पीवीके की सरकार बनने जा रही है। वहीं दूसरी ओर तमाम कोशिशों के बाद भी भगवा खेमा केरल में सेंध नहीं लगा पाया है। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल बात की जाए तो भाजपा शुरू से ही अपनी मजबूत पकड़ बनाए नजर आ रही है। मतगणना में तेजी से प्रगति के साथ भाजपा ने टीएमसी की 92 सीटों के मुकाबले 189 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल कर ली, जो ममता बनर्जी के लंबे समय से प्रभुत्व वाले राज्य में संभावित राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत दे रही है और एक महत्वपूर्ण सत्ता परिवर्तन के लिए मंच तैयार कर रही है।
नतीजों के साथ जश्र
जैसे ही नतीजे बीजेपी के पक्ष में आए, कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय समेत पूरे राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल छा गया। उत्साहित समर्थकों और विजय जुलूसों से लेकर सड़कों पर उमड़ते जोश तक, ज़मीनी स्तर पर दिखाई दिया। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी कोलकाता के सखावत मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल स्थित मतगणना केंद्र पर जा पहुंचे। राज्य मंत्री सुकांता मजूमदार दक्षिण दिनाजपुर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ जश्न मनाते हुए विजय चिह्न दिखाते हैं। भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने भी जश्न में हिस्सा लिया। टीएमसी समर्थक अपनी जीत की संख्या को हाथ से फिसलते हुए देख रहे हैं। राजनीतिक हास्य कलाकार रतन रंजन ने मीडिया को संबोधित करते हुए झालमुरी खाते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नकल की। नारे लगाते हुए भाजपा समर्थक कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने से गाड़ियों में बैठकर गुजरे।
अंग-बंग-कलिंग का लक्ष्य हुआ पूरा
गृहमंत्री अमित शाह ने 24 अप्रैल को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, ‘बंगाल जीतने के साथ अपना अंग, बंग और कलिंग जीतने का लक्ष्य हासिल कर लेगी. अंग यानी बिहार, बंग यानी बंगाल और कलिंग यानी ओडिशा. दोनों जगहों पर पहले से मुख्यमंत्री हैं° अब बंगाल की बारी है° बंगाल में प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही भाजपा ने ये लक्ष्य भी हासिल कर लिया है। इस शानदार प्रदर्शन से 83 साल बाद बंगाल में हिंदू पॉलिटिक्स की एंट्री हो गई है। आजादी से पहले 1941 में कृषक प्रजा पार्टी और हिंदू महासभा के नेतृत्व में बने प्रोग्रेसिव कोएलिशन (प्रगतिशील गठबंधन) की बंगाल में सरकार बनी थी। ये सरकार 1943 तक चली. आजादी के बाद कांग्रेस ने बंगाली भद्रलोक को साधा और 20 साल तक सरकार चलाई। फिर दौर आया लेफ्ट का. लेफ्ट ने 34 साल तक सत्ता की बागडोर संभाली. इसके बाद 2016 से ममता का दौर शुरू हुआ। अब भाजपा के सरकार बनने से बंगाल में 83 साल बाद हिंदुत्व की राजनीति की वापसी हुई है।
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