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मेरठ

देरी से दायर की गयी सुप्रीमकोर्ट में याचिका

Petition filed in Supreme Court

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देरी से दायर की गयी सुप्रीमकोर्ट में याचिका
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मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के सेटबैक विवाद में आज सेक्टर दो की महिलाओं की याचिका दाखिल कर दी गयी है। हालांकि याचिका थोड़े विलंब से दाखिल की गयी। दरअसल कुछ पेपरों की कमी के चलते याचिका दाखिल होने में देरी की गयी। इस मामले में पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट हरी पुजानिया ने जानकारी दी कि इसके लिए सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी गयी थी। एक पेपर की और दरकार सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता ने की। वो पेपर मेरठ कचहरी में तैयार कराने के बाद उन्हें भेज दिया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि युवा एडवोकेट राहुल मलिक ने जानकारी दी कि सुप्रीमकोर्ट में आमतौर पर याचिकाएं ऑन लाइन दायर की जाती हैं, जो लेट तक भी दायर की जा सकती हैं। वहीं दूसरी ओर बताया गया है कि संभवत यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विवेक नारायण शर्मा दायर करेंगे।

सलमान खुर्शीद से की मुलाकात

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट सैक्टर दो छोटे व मझोले मकानों के सैटबैक को लेकर भेजे जा रहे नोटिसों को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती देने के लिए सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद से भी मुलाकात की गयी है। यह भी पतात चला है कि सलमान खुर्शीद की फीस ही 25 लाख से शुरू होती है, लेकिन मेरठ के युवा एडवोकेट राहुल मलिक ने अपनी कनेक्शन की मार्फत सलमान खुर्शीद को शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट सैक्टर दो का केस सुप्रीमकोर्ट में महज एक रुपए फीस पर लड़ने के लिए तय कर लिया है। राहुल मलिक ने यह भी जानकारी दी कि वो अब गुरूवार को सलमान खुर्शीद से मिलेंगे। उनको केस से संबंधित फाइल सौंपेंगे। इससे पहले सलमान खुर्शीद से मिलकन उन्हें पूरी बात समझा चुके हैं।

सैटबैक छोड़ा तो मकान फिर बचेगा ही कहां मकान

जो याचिका दायर की गयी है उसमें कोर्ट को बताया जाएगा कि यदि सैटबैक छोड़ा तो मकान बचेगा ही कहा। इसके अलावा यह भी जानकारी दी जाएगी कि जब आवास विकास परिषद ने ये प्लाट बेचे थे उस वक्त उनके बॉयलॉज में कहीं भी सैटबैक का कोई जिक्र माजरा नहीं था। इतना ही नहीं साल 1982 में आवास विकास परिषद ने जो मकान खुद बनाकर बेचे थे उसमें भी कहीं भी किसी प्रकार के सैटबैक का कोई जिक्र नहीं था। ये तमाम मकान छोटे हैं और उनमें सेटबैक छोड़ना संभव नहीं है। ऐसा करने से मकानों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1986 में बनी योजना में शुरू से सेटबैक का प्रावधान नहीं था। इन मकानों में व्यापार करने की अनुमति भी दी गई थी, जिसे अब हटाया जा रहा है। इस याचिका के जरिए अल्प और कमजोर आय वर्ग के अन्य लोगों का पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में रखा जाएगा।

कोरियर से भेजे जा रहे नोटिस

आवास विकास परिषद के अफसर अब बजाए नोटिस चस्पा कराने के सीधे कोरियर से नोटिस भेज रहे हैं। दरअसल ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जब जब नोटिस चस्पा किए जाने का प्रयास किया वहां पर हंगामा हो गया। पुलिस को बुलाना पड़ गया। नौबत मौके से जान बचाकर भागने तक की आ गयी। अब तक सभी मकानों के नोटिस जिनकी संख्या 815 है कोरियर से भेजे जा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर पूरे सैंट्रल मार्केट में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ। सैक्टर दो में रहने वाले परिवार बुरी तरह से घबराए हुए हैं।
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