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टिकट पर संकट के बादल नए ठिकाने की तलाश

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टिकट पर संकट की आशंका के चलते समाजवादी और कांग्रेस का रूख कर रहे भाजपा के कदावर नेता

नई दिल्ली/लखनऊ/ मेरठ। यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के चालिस फीसदी विधायकों के टिकट कटना तय है। टिकट पर मंडरा रहे संकट के बादलों के चलते भाजपा के तमाम कदावर नेता समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में ठौर ठिकाना बना चुके हैं या फिर बहुत जल्दी पाला बदलने पर उतारू हैं। वेस्ट यूपी के कई कदावर भाजपाई या तो सपाई हो गए या फिर कांग्रेसी। पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर से आने वाले दिग्गज ओबीसी नेता राजपाल सैनी ने हाल ही में अपने पुत्र के साथ भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। सैनी समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है और चुनाव से ठीक पहले उनका जाना पश्चिमी यूपी में भाजपा के पिछड़ा वर्ग समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। मुजफ्फरनगर-शामली बेल्ट के पुराने और वफादार जाट नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व विधायक प्रदीप बालियान ने भी भाजपा को अलविदा कहकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। लोध और कश्यप समाज के कद्दावर नेता धर्मेंद्र कश्यप ने हाल ही में भाजपा से इस्तीफा देकर समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली। 2026 के राज्यसभा चुनाव में टिकट न मिलने और पार्टी के भीतर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा का रुख किया। वेस्ट यूपी से सटे बदायूं जिले की बिसौली सीट से पूर्व भाजपा विधायक कुशाग्र सागर ने भी 21 अक्टूबर 2026 को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर पार्टी की नीतियों और सम्मान न मिलने को लेकर नाराजगी जताई थी। पूर्व मंत्री और बड़े कुशवाहा चेहरे राम आसरे कुशवाहा ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया और समाजवादी पार्टी में घर वापसी कर ली है। वे करीब 13 साल बाद दोबारा सपा में शामिल हुए हैं, जिससे मौर्य-कुशवाहा-शाक्य वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।

पाला बदलने की वजह

अक्टूबर में हुए यूपी राज्यसभा चुनावों में पार्टी द्वारा सभी पुराने चेहरों को ड्रॉप कर बिल्कुल नए सामाजिक समीकरण (सोशल इंजीनियरिंग) को तरजीह दिए जाने से कई सीनियर नेता नाराज चल रहे थे। मीडिया और अंदरूनी सर्वे रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 चुनाव में भाजपा सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को कम करने के लिए 30% से 40% मौजूदा और पूर्व विधायकों के टिकट काट सकती है। इस वजह से नेता पहले ही सुरक्षित ठिकानों (सपा या कांग्रेस) की तलाश में पाला बदल रहे हैं। अखिलेश यादव का पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानि पीडीए का फॉर्मूला वेस्ट यूपी के सैनी, कश्यप और कुशवाहा जैसे गैर-यादव ओबीसी नेताओं को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल हो रहा है।

सपा के 3 बागी विधायक भाजपा में शामिल

14 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज, अमेठी), अभय सिंह (गोसाईगंज, अयोध्या) और विनोद चतुर्वेदी (कालपी, जालौन)—आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गए। इन तीनों ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी।
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