सवालों के घेरे में आए भाजपा नेता दुष्यंत कुमार को राज्यपाल बना देने के बाद भाजपा के खिलाफ महिलाओं में भारी गुस्सा
नई दिल्ली। पूरे देश और खासतौर से उत्तराखंड को हिला देने वाले अंकिता भंडारी हत्या कांड़ को लेकर सवालों के घेरे में आए भाजपा नेता दुष्यंत कुमार को सिक्कम का राज्यपाल बना देने के बाद भाजपा नेतृत्व के खिलाफ देश भर में महिलाओं में भारी गुस्सा है। अंकिता भंडारी के माता-पिता की सिसकियों और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर दागी चेहरों को बैठाने के आरोपों ने एक बार फिर जनता के बीच आक्रोश को भड़का दिया है। देश भर में हो रहे इन प्रदर्शनों के बीच नागरिक समाज यह सवाल पूछ रहा है कि क्या सत्ता की कुर्सियां इतनी मजबूत हैं कि उनके सामने एक पीड़ित परिवार की न्याय की गुहार दबा दी जाएगी? उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद, विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भाजपा के ‘महिला सम्मान’ और ‘बेटी बचाओ’ के नारों को महज एक दिखावा और ढोंग करार दिया है। अंकिता भंडारी के माता-पिता खुद दिल्ली के इंडिया गेट पर आधी रात को धरने पर बैठ गए, जिसके बाद देश भर में भाजपा सरकार की चौतरफा निंदा हो रही है और जगह-जगह तीखे प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस नियुक्ति की खबर मिलते ही अंकिता भंडारी के लाचार माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने इंडिया गेट के पास रात भर प्रदर्शन किया और मांग की कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
रिसॉर्ट से लेकर राजभवन तक
सितंबर 2022 (हत्याकांड): उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के ‘वनंतरा रिसॉर्ट’ में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य (जो भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है) और उसके कर्मचारियों ने अंकिता पर वहां आने वाले एक ‘वीआईपी (VIP) गेस्ट’ को “विशेष सेवा” (कथित शारीरिक संबंध) देने का भारी दबाव बनाया। अंकिता द्वारा साफ इनकार करने के बाद, आरोपियों ने उसे चीला नहर में धक्का देकर मार डाला। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को इस जघन्य हत्याकांड के लिए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
वीआईपी’ का रहस्य और दुष्यंत गौतम का नाम
कोर्ट से सजा होने के बावजूद इस मामले में ‘वीआईपी’ का एंगल लगातार बना रहा कि आखिर वह प्रभावशाली व्यक्ति कौन था, जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था? साल 2025 के अंत में सोशल मीडिया पर कुछ कथित ऑडियो-वीडियो क्लिप्स और बयानों के आधार पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस वीआईपी लिंक से जोड़ा जाने लगा। हालांकि, दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और जनवरी 2026 में इसके खिलाफ कोर्ट में मानहानि का मुकदमा भी दायर किया।
सीबीआई (CBI) जांच और राज्यपाल की नियुक्ति
अंकिता के माता-पिता की लगातार मांग के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनवरी 2026 में मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। अभी सीबीआई की जांच चल ही रही है और इस कथित ‘वीआईपी’ की आधिकारिक पहचान उजागर होना बाकी है, इसी बीच केंद्र सरकार ने अचानक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया।
विपक्ष हमलावर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनके संघर्ष को अपना समर्थन दिया है और सरकार के इस रवैए की कड़ी निंदा की है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस कदम को उत्तराखंड की महिलाओं की अस्मिता और पहचान पर सीधा प्रहार बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने लोकभवन के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर देश की बेटी की हत्या के मामले में उंगली उठ रही है, उसे राज्यपाल बनाकर भाजपा कानूनी संरक्षण (इम्युनिटी) देना चाहती है। राज्यपाल पद पर रहते हुए उन पर कार्रवाई करना बेहद जटिल हो जाएगा। हालांकि भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में बेहद संवेदनशीलता और तेजी से काम किया है। मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया और उन्हें उम्रकैद की सजा भी मिल चुकी है।
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