बैंच नहीं तो फिर यूपी विधानसभा चुनाव में वोट भी नहीं, विराेध करने वालों को भुगतना होगा परिणाम
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच के लिए 2 दिसंबर को वेस्ट यूपी के अधिवक्ता दिल्ली में गरजेंगे। वेस्ट यूपी के 22 जनपदों के वकीलों ने दो टूक कहा है कि यदि बैंच नहीं दी गयी तो विधानसभा चुनाव में खुलकर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि बैंच नहीं तो वोट भी नहीं। वहीं दूसरी ओर आज झमाझम बारिश के बाद भी बैंच के लिए न्याय यात्रा निकाल रहे वकीलों के जोश में किसी प्रकार कमी नहीं देखी गयी। न्याय यात्रा बैंच की मांग को जनांदोलन बनाने के लिए निकाली जा रही है। इसका शुभारंभ केंद्रीय संघर्ष समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा (अध्यक्ष, मेरठ बार एसोसिएशन) और संयोजक परवेज आलम (महामंत्री, मेरठ बार एसोसिएशन) ने बीती 14 अक्टूबर को हरी झंडी दिखाकर शुरू की। यात्रा का मुख्य मकसद प्रदेश की आम जनता को हाई कोर्ट बेंच की स्थापना के लिए जागरूक करना और आंदोलन से जोड़ना है। परवेज आलम ने बताय कि यह यात्रा 50 दिन चलेगी और 2 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेगी। यहां पश्चिम उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के वकील अपनी मांग उठाएंगे। केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने बताया कि मार्ग में यात्रा को अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है स्वागत किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार पर दबाव बनाने का यही सही मौका है। ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा पहले ही दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 22 जिलों के अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर निर्णय लिया गया है। पूर्व में अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में भाजपा नेताओं की नो एंट्री के पोस्टर भी चस्पा किए थे। उनका कहना है कि यदि मांग नहीं मानी गई तो आगामी चुनाव में नतीजा भुगतना पड़ेगा।
22 जिलों में वाहनों पर लगाकर विरोध
इस नारे के स्टीकर सभी 22 जिलों में वाहनों पर लगाकर विरोध हो रहा है। 2 दिसंबर को वकील और जनता दिल्ली पहुंचकर धरना-प्रदर्शन कर बेंच की मांग करेंगे। न्याययात्रा 22 जिलों से होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। जहां देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और कानून मंत्री को ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्या को अवगत कराएंगे। उनका कहना है कि पश्चिम के अधिवक्ता ही नहीं आम लोगों को भी समस्या झेलनी पड़ती है। मेरठ से इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी 800 किलोमीटर हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी सस्ता और सुलभ न्याय देने का दावा करती है। जब एक पीड़ित 800 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद हाई कोर्ट पहुंचेगा तो उसे सस्ता और सुलभ न्याय कैसे मिलेगा। इसके बाद उन्हें वहां जाकर एक वकील भी करना होता है। लेकिन इस मामले में सरकार हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं है।
इस यात्रा में मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कुंवरपाल शर्मा, उदयवीर सिंह राणा, पूर्व महामंत्री प्रबोध कुमार शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार, उपाध्यक्ष संजय यादव, कोषाध्यक्ष विकास रावत समेत कई अन्य अधिवक्ताओं का योगदान रहा।
Leave a comment