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दा गार्जियन, अल जजीरा, फॉक्स न्यूज, सीएनएन, डॉयचे वेले (DW), ले मोंडे, एएफपी की बड़ी कवरेज

नई दिल्ली। The Guardian/दा गार्जियन के मुताबिक भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और उन पर लगे मतदाता सूची में धांधली (SIR प्रक्रिया) के आरोपों ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। विदेशी मीडिया ने इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई को बेहद आक्रामक और विस्तृत तरीके से कवर किया है। रॉयटर्स, अल जजीरा, डॉयचे वेले (DW), ले मोंडे और एएफपी जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने लोकतंत्र की विश्वसनीयता से लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगे आघात तक, कई पहलुओं को उजागर किया है। ने एक विशेष रिपोर्ट में बताया कि प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों, जिनमें खुद रॉयटर्स के पत्रकार भी शामिल थे, को पुलिस ने हिरासत में लिया और उनके काम में बाधा डाली। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर लिखा कि राजधानी एक किले में तब्दील हो गई थी और अधिकारियों ने भारी बल का प्रयोग किया। कतर के प्रसारक अल जज़ीरा ने इस आंदोलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने पिछले एक दशक की सबसे बड़ी युवा चुनौती बताया है। उन्होंने लिखा कि हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, नेताओं और पत्रकारों की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई है और बिना शर्त रिहाई की मांग की है, जिसका भारत सरकार ने खंडन किया है। संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल ब्रिटिश अखबार The Guardian और जर्मन मीडिया डॉयचे वेले ने रिपोर्ट किया कि भारतीय चुनाव प्रणाली, जो पहले वैश्विक स्तर पर अपनी निष्पक्षता के लिए सराही जाती थी, अब एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। चुनाव आयुक्तों के बीच आंतरिक मतभेद: The Indian Express की उस जांच का विदेशी मीडिया ने बार-बार हवाला दिया, जिसमें खुलासा हुआ था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने ही वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने पर आश्चर्य वैश्विक मीडिया ने इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया है कि पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान लगभग 130 मिलियन (13 करोड़) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कि जापान की कुल आबादी से भी अधिक है। विपक्ष के इन आरोपों को भी स्थान दिया गया है कि हटाए गए नामों में अल्पसंख्यक और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है ताकि सत्ताधारी दल को चुनावी लाभ मिल सके।

पुलिसिया दमन ‘लॉकडाउन’ जैसी स्थिति पर कवरेज

कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा ने अपनी लाइव रिपोर्टिंग में बताया कि नई दिल्ली के मध्य व्यापारिक क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया, दर्जनों मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया और धारा 144 लागू की गई। विदेशी पत्रकारों ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए सरकार का “अत्यधिक सख्त कदम” बताया है। वैश्विक समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) और फ्रांस के प्रतिष्ठित अखबार LE Monde ने रिपोर्ट किया कि शनिवार और रविवार के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य युवा नेताओं सहित हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। दिपके को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान से उतरने से पहले ही हिरासत में लेने की घटना को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने “अलोकतांत्रिक तानाशाही” का उदाहरण बताया। अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया वैश्विक मीडिया ने एमनेस्टी इंटरनेशनल और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के बयानों को प्रमुखता दी है, जिन्होंने भारत सरकार द्वारा आलोचनात्मक आवाजों को दबाने और प्रेस की स्वतंत्रता पर बढ़ते खतरों की कड़ी निंदा की है। विदेशी मीडिया, विशेष रूप से France 24 और South China Morning Post (SCMP), भारत के इस अनूठे युवा नेतृत्व वाले सोशल मीडिया और जमीनी आंदोलन (CJP) को लेकर बेहद उत्सुक है। मीडिया रिपोर्ट्स में याद दिलाया गया कि इसी ग्रुप ने जुलाई 2026 में परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था, और अब यह समूह चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है।

प्रेस की आजादी पर हमला (पूरी तरह से रिपोर्टेड तथ्य)

यह कोई धारणा नहीं, बल्कि ऑन-रिकॉर्ड तथ्य है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने खुद आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट किया है कि प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान उनके अपने संवाददाताओं को दिल्ली पुलिस द्वारा निशाना बनाया गया और हिरासत में लिया गया [Reuters]। अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे विशुद्ध रूप से भारत में स्वतंत्र पत्रकारिता को कुचलने और दुनिया के सामने जमीनी हकीकत आने से रोकने के प्रयास के रूप में देख रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मानवाधिकारों पर चिंता जताई और इंटरनेट बंद किया जाना बेहद आपत्तिजक क्रिया करा दिया गया है।
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