कैंट एक्ट की धारा 34 के अंतर्गत कार्रवाई रक्षा मंत्रालय द्वारा उनकी कैंट बोर्ड की मनोनीत सदस्यता की समाप्त
मेरठ। कैंट बोर्ड की पॉलटिक्स से संघ के करीबी माने जाने वाले डा. सतीाश शर्मा आउट कर दिए गए हैं। तीन लाख की घूस के साथ रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद सीबीआई ने जेल भेज दिया था। हालांकि हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गयी है और वह सलाखों के पीछे से बाहर आ गए हैं, लेकिन तमाम लोग भाजपा के ही तमाम लोग उनकी पॉलटिकल पारी डेथ मानने लगे है। वहीं दूसरी ओर सवाल पूछा जा रहा है कि डा. सतीश शर्मा के आउट होने के बाद अब कैंट बोर्ड में बतौर नामित मैंबर किस की एंट्री होगी। वैसे संघ के सूत्रों की मानें तो किसी ऐसे चेहरे की तलाश है जिस पर दाग ना हो।
तमाम पूर्व पार्षद कतार में
कैंट बोर्ड के कई ऐसे पूर्व मैंबर हैं जो नामित सदस्य बनने का दावा ठोक रहे हैं। सीबीआई के हाथों डा. सतीश शर्मा के धरे जाने के बाद तमाम दावेदारों की बांछे खिल गयीं। अब जब रास्ता पूरी तरह से क्लीयर है तो बोर्ड के पूर्व मैंबर अपने राजनीतिक आकाओं की मार्फत रक्षा मंत्रालय में गोटियां फिट करने में लग गए हैं। कैंट बोर्ड के मनोनीत मैंबर बनने के लिए यूं कतार में भाजपा के कई दावेदार हैं। भाजपा का नाम इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि किसी दूसरे के लिए कोई स्कोप नहीं है। इसलिए यह तो तय है कि भाजपा से ही कोई आएगा या आएगी, हालांकि अनुमान है कि इस प्रक्रिया को पूरी होने में करीब छह माह लग सकते हैं। यदि यह अनुमान सही है तो माना जाना चाहिए कि यूपी समेत कई राज्यों के प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के बाद ही कौन बनेगा कैंट बोर्ड का नामित मैंबर इस पर फैसला होगा। वहीं दूसरी ओर कैंट बोर्ड का नामित का नाम भाजपा के बड़े नेताओं का भी कद तय कर देगा। भाजपा के तमाम ऐसे बड़े नेता हैं जो इस बेहद प्रभावशाली मानी जाने वाली कुर्सी पर अपने करीबी या चहेते को पहुंचाने के प्रयास में जुट गए हैं।
पब्लिक के मन की बात
छावनी क्षेत्र के लोगों के मन की बात करें तो वो चाहते हैं कि कैंट बोर्ड का मैंबर ऐसा शख्स बनना या बननी चाहिए जिसको वहां के कायदे कानूनों का बेहतर तरीके से इलम हो। अफसरों से बात करने की और फौज के अफसरों से अपनी बात मनवाने की काबलियत रखता हो। ऐसा बिलकुल नहीं चाहिए जो कठपुतली बनकर दो कदम आगे चार कदम पीछे नजर आए। मैंबर ऐसा होना चाहिए जो कैंट बोर्ड के कायदे कानून ही नहीं बल्कि अफसरों से भी बेहतर वाकिफ हो। इस मामले में पब्लिक का खांचे या कहें सांचे में कौन फिट बैठता है या बैठती है नामित मैंबर के नाम पर फैसला करने से पहले भाजपा के रणनीतिकारों को यह भी ध्यान में रखना होगा। सबसे बड़ी बात पब्लिक में जिसकी स्वीकार्यता हो या पब्लिक की पहली पंसद हो ऐसा नाम सामने लाया जाना चाहिए। वैसे चर्चा की बात करें तो कैंट बोर्ड के पूर्व मैंबरों के अलावा भाजपा और संघ के करीबी माने जाने वाले अमन गुप्ता का नाम भी लिया जा रहा है और अंकित सिंहल भी कतार में बताए जा रहे हैं, हालंकि यह कयास या चर्चा भर हें। नाम फाइनल तो भाजपा के कार्यालय में होना है।
ये हुआ डा. सतीश शर्मा के साथ
30 मई को गांधी बाग के ठेके को लेकर ठेकेदार विक्की कश्यप द्वारा सीबीआई से शिकायत की गई थी। सीबीआई की गाजियाबाद ब्रांच द्वारा जाल बिछाकर डाॅ. सतीश शर्मा को ठेकेदार के दिये रुपये 3 लाख के साथ उनके निवास अंसल टाउन मेरठ से गिरफ्तार किया गया था और उसके उपरांत उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें डासना जेल भेज दिया था, तब से वो डासना जेल में ही थे। गत 5 अगस्त को सीबीआई कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसपर अब हाईकोर्ट में अपील की गई थी।गौरतलब है कि सीबीआई द्वारा डाॅ. सतीश शर्मा की गिरफ्तारी की सूचना को कैंट बोर्ड मेरठ द्वारा कैंट बोर्ड अध्यक्ष स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर संजीव कुमार सिंह को अवगत करवाने के उपरांत बोर्ड द्वारा उन पर कैंट एक्ट की धारा 34 के अंतर्गत कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी थी और रक्षा मंत्रालय द्वारा उनकी कैंट बोर्ड की मनोनीत सदस्यता समाप्त कर दी थी ।
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