IRGC ने जलक्षेत्र में गश्त कर रहे दो अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों (एक एयरक्राफ्ट कैरियर और एक डिस्ट्रॉयर) पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर किया नष्ट
नई दिल्ली। ईरान की अमेरिका और इजरायल से जंग बेहद खतरनाक हो चुकी है। ईरान ने अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर डूबो दिए हैं। इससे अमेरिका बुरी तरह से बौखलाया हुआ है और बदले में भीषण तबाही की बात कह रहा है। बीते कुछ दिनों में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे दो अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों (एक एयरक्राफ्ट कैरियर और एक डिस्ट्रॉयर) पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी सेना का दावा है कि उनके युद्धपोतों ने इन मिसाइल हमलों को नाकाम कर दिया। इससे ठीक पहले, ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और इराक में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाया था। जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी मरीन ठिकानों पर 13 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 10 को जॉर्डन के एयर डिफेंस ने हवा में मार गिराया। बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर भी ईरान ने बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ट्रंप की धमकी
तनाव बढ़ने के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी सेना बहुत जल्द ईरान के ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) को निशाना बना सकती है, जिसे ईरान का एक प्रमुख संदिग्ध परमाणु ठिकाना माना जाता है। वहीं दूसरी ओर कहा जा रहा है कि इस नए तनाव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी हमलों के दौरान दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह पर बम गिर गया था, जिसमें कई नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मोर्चा खोल दिया।
ईरानी तेल टैंकरों पर बमबारी
अमेरिकी युद्धपोतों पर हुए हमले के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार (5 सितंबर 2026) को ईरान के तीन तेल टैंकरों (ऑयल कैरियर्स) पर भीषण हवाई हमले किए। इनमें से एक हमला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप (Kharg Island) के पास हुआ। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी, तो वह ईरान के पूरे तेल बेड़े को तबाह कर देगा। वहीं दूसरी ओर कहा जा रहा है कि इस तनातनी के पीछे इस साल जून (2026) में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता (MoU) हुआ था, लेकिन जुलाई में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर फिर से नियंत्रण और हमले शुरू करने के बाद यह युद्ध विराम पूरी तरह टूट गया। ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना वर्चस्व दिखाकर टैक्स वसूलना चाहता है, जबकि अमेरिका ने इसके जवाब में ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकाबंदी कर रखी है।
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