राखी पर्व रक्षा बंधन की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही मानी जाती है, सृष्टि में पहली बार राखि शचि ने इंद्र को बांधी थी
नई दिल्ली/वाराणसी। भाई की कलाई पर बहनों की राखी में तीन गांठे मारने की परंपरा त्रिदेव यानि महादेव,-ब्रह्म-विष्णु की पौराणिक कथा से जुड़ी हैं। पहली गांठ (ब्रह्मा जी का प्रतीक) यह गांठ सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। इसे भाई की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए बांधा जाता है। राखी की दूसरी गांठ सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का प्रतीक मानी जाती है. यह गांठ भाई को सभी परेशानी व संकट से दूर रखती है और सुख-शांति प्रदान करती है. यह भाई के जीवन में सुरक्षा और स्थिरता लाती है। राखी की तीसरी गांठ सृष्टि के संहारक भगवान शिव का प्रतीक मानी जाती है. यह गांठ भाई के जीवन से नकारात्मकता, परेशानी, विघ्न, और बुराइयों को दूर करती है. यह भाई के जीवन को हर मोड पर मजबूत बनाती है। अब सवाल होता है कि पहली राखी किसने किसको बांधी। भविष्य पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में जब देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था और देवता हारने लगे थे, तब इंद्रदेव की पत्नी शचि ने अपने तपोबल से एक पवित्र रेशमी धागा (रक्षासूत्र) तैयार किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र की शक्ति से इंद्रदेव ने असुरों पर विजय प्राप्त की। पुराने समय में रक्षासूत्र केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि सुरक्षा के लिए बांधा जाता था।
राखी की पांच गांठें
कुछ जगहों पर भाई की कलाई पर राखी बांधते समय 5 गांठे लगाना शुभ माना जाता है. इन पांच गांठों का पंचतत्व यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु का प्रतीक मानी जाती हैं। वैसे राखी बांधते समय भाई को कितनी गांठें लगानी चाहिए, अगर आप असमंजस में हैं तो बता दें कि आप तीन गांठें भी लगा सकते हैं और पांच भी। तीन गांठ त्रिदेव का तो पांच गांठें पंचतत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। आप अपनी परंपरा और मान्यता के आधार पर तीन या पांच गांठ लगा सकते हैं।
श्रीकृष्ण द्रोपदी कथा
महाभारत की कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया, तो उनकी उंगली में चोट लग गई और खून बहने लगा। वहां मौजूद द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया। श्री कृष्ण ने इस उपकार के बदले द्रौपदी को हमेशा रक्षा करने का वचन दिया और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर अपना वादा निभाया। इसके अलावा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने राजा बलि के दानधर्म से प्रसन्न होकर उनके पाताल लोक में रहने का वचन दे दिया, तो माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। भगवान विष्णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने एक गरीब महिला का रूप धरा और राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उन्हें अपना भाई बना लिया। उपहार के रूप में उन्होंने राजा बलि से भगवान विष्णु को वापस मांग लिया। एक अन्य कथा के अनुसार भविष्य पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में जब देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था और देवता हारने लगे थे, तब इंद्रदेव की पत्नी शचि ने अपने तपोबल से एक पवित्र रेशमी धागा (रक्षासूत्र) तैयार किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इस रक्षासूत्र की शक्ति से इंद्रदेव ने असुरों पर विजय प्राप्त की। पुराने समय में रक्षासूत्र केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि सुरक्षा के लिए बांधा जाता था।
रानी कर्णावती की हुमांयू को राखी
इतिहास में मध्यकाल के दौरान, जब चित्तौड़ की राजपूत रानी कर्णावती पर गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने आक्रमण किया, तो रानी ने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी। हुमायूं ने राखी का मान रखा और अपनी सेना लेकर रानी की मदद के लिए निकल पड़ा था।
Leave a comment