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पब्लिक पार्षदों के और पार्षद अफसरों के पीछे

पब्लिक पार्षदों के और पार्षद अफसरों के पीछे

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पब्लिक पार्षदों के और पार्षद अफसरों के पीछे
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तमाम वार्डों में काम में हो रही देरी से आपा खो रही पब्लिक घेर रही है पार्षदों को और पार्षद अफसरों को

मेरठ। महानगर के तमाम ऐसे वार्ड हैं जहां नाले खड़ंजे खुदे हुए हैं। खुद महापौर के गृह क्षेत्र का इलाका यानि शिवाजी रोड भी ऐसे ही इलाकों में शुमार है। वहां भी खुदाई के बाद अरसे से काम रुका पड़ा। नाले नालियों का काम तमाम वार्ड में रुका पड़ा है। ऐसे वार्डों की पब्लिक अपने इलाके के पार्षदों को घेर रही है और पार्षद नगर निगम के अफसराें को घेर रहे हैं। इस सब के बीच कार्यदायी संस्था यानि नगर निगम से काम का ठेका लेने वाला ठेकेदार गायब है, जबकि सारे फसाद की जड‍़ ठेकेदार ही है। नगर निगम प्रशासन ने जहां-जहां पार्षदों ने बताया वहां काम कराने के लिए ठेका दे दिया लेकिन वक्त पर काम पूरा करने के बजाए आमतौर पर ठेकेदार गायब हो जाते हैं। नतीजा यह होता है कि वार्ड जहां आधा अधूरा काम छोड़कर पार्षद गायब हो जाता है वहां की पब्लिक परेशानियों के चलते आपा खो देती है और पब्लिक की शिकायतों के बाद पार्षद की सारी गर्मी निगम के अफसरों पर निकलती है। यह आए दिन की और तमा वार्ड की बात हो गयी है।

निगम में हंगामा

ऐसे ही ठेकेदारों की कारगुजारियों को लेकर तमाम दलों के पार्षदों ने नगर निगम निर्माण विभाग की चीफ प्रमोद सिसौदिया के कार्यालय पर हंगामा किया। कक्ष में बैठकर धरना दिया। वो अपने वार्ड में सड़कों के काम में देरी और बनी हुई सड़कों की खराब गुणवत्ता को लेकर नाराज हैं। सपा पार्षद कीर्ति घोपला अपने समर्थक पार्षदों के साथ मुख्य अभियंता के दफ्तर पहुंचीं और रुके पड़े सड़क के कामों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा। आरोप है कि बातचीत के दौरान मुख्य अभियंता पीके सिसोदिया दफ्तर से बाहर चले गए। इससे पार्षद और उनके समर्थक नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने दफ्तर के बाहर धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गरमा गया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। पार्षद कीर्ति घोपला ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड में बनने वाली सड़क का काम लंबे समय से अटका हुआ है। इसके अलावा कई जगह हुए कामों की गुणवत्ता को लेकर भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उनका कहना था कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें टालने में लगे हैं।

नहीं बनायी जा रही सड़कें

धरने में पार्षद इकराम चौधरी समेत कई अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे। सूचना मिलते ही गांव घोपला से बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता भी नगर निगम पहुंच गए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर रहा है और विकास कार्यों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।कीर्ति घोपला ने कहा कि निगम अधिकारी अब न जनता की सुन रहे हैं और न ही पार्षदों की। अगर विकास कार्यों में लापरवाही इसी तरह जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता देशराज सिंह ने पार्षदों से बातचीत की और 15वें वित्त आयोग की मद से जल्द सड़क का काम शुरू कराने का भरोसा दिया। इसके बाद पार्षदों ने धरना खत्म कर दिया। यह कहना है चीफ का मुख्य अभियंता पीके सिसोदिया ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जिस सड़क का मामला उठाया जा रहा है, वह वन विभाग की अनुमति से जुड़ा हुआ है। सड़क बनाने से पहले वन विभाग की एनओसी लेना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पहले इस मामले में संबंधित जूनियर इंजीनियर के खिलाफ वन विभाग कार्रवाई भी कर चुका है। ऐसे में नियमों को नजरअंदाज कर सड़क का काम शुरू नहीं कराया जा सकता।
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