नई दिल्ली। भारतीय रेलों में सफर करना जोखिम भर है यह बात रेलवे मंत्रालय ने मानी है। एक आरटीआई के उत्तर में सरकार ने माना है कि साल 2021 से लेकर साल 2024 के बीच भारत में 131 ट्रेन दुर्घटनाएं यानि डिरेलीमेंट हुई हैं। सरकार की ओर से दिए गए उत्तर के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। यात्री पूछ रहे हैं कि क्यों ना रेल से यात्रा करना छोड़ दिया जाए। हालांकि इन हादसों की वजह से की बात की जाए तो वो अलग-अलग कारण गिनाए जा रहे हैं। लेकिन बड़ी वजह मानवीय चूक माना गया है।
पिछले 3 वर्षों में औसतन हर महीने 2 पैसेंजर ट्रेन और 1 मालगाड़ी पटरी से उतरी हैं। दुनिया के रेलवे सिस्टम की यदि बात करें तो यह भारत के नजरिये से बड़ा आंकड़ा है। सरकार के अनुसार, पिछले दशक में ट्रेन हादसों में 90% से अधिक की कमी आई है, 2004-14 के 1711 हादसों के मुकाबले 2024-25 में यह घटकर 31 रह गए। रेलवे ‘कवच’ (स्वदेशी टक्कर सुरक्षा प्रणाली), सिग्नलिंग के आधुनिकीकरण और पटरियों के रखरखाव पर जोर दे रही है, लेकिन 131 हादसों के आंकड़े इन उपायों की गति पर सवाल उठाते हैं। इन हादसों का एक बड़ा कारण भारतीय रेलवे सिस्टम का काफी पुराना है जो भारत को ब्रिटिश देकर गए हैं।
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