Home देहरादून बोया पेड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का, तो हरीश रावत जैसा नेता कहाँ से मिले ? भाजपा की अचानक ‘हमदर्दी’ पर सवाल
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बोया पेड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का, तो हरीश रावत जैसा नेता कहाँ से मिले ? भाजपा की अचानक ‘हमदर्दी’ पर सवाल

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विक्रम श्रीवास्तव

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में रामनगर विधानसभा क्षेत्र को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब भाजपा के लिए नया राजनीतिक खेल का मौका बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 15 दिन के राजनीतिक अवकाश और संजय नेगी की कांग्रेस में एंट्री अटकने को लेकर भाजपा नेताओं और आईटी सेल ने अचानक हमदर्दी दिखानी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट्स आ रहे हैं — “हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता को कांग्रेस में इतना तिरस्कार”, “गुटबाजी ने कांग्रेस को खोखला कर दिया” और “रावत ने कांग्रेस को उत्तराखंड में जिंदा रखा”।
लेकिन यही भाजपा है जिसने विधानसभा चुनाव के दौरान हरीश रावत पर मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने का भारी दुष्प्रचार किया था। रावत को “मुस्लिम तुष्टिकरण” का चेहरा बताकर वोट मांगे गए। अब वही भाजपा हरीश रावत की नाराजगी पर आंसू बहा रही है।
क्या है असलियत?
हाल ही में दिल्ली में छह नेताओं (तीन पूर्व विधायकों सहित) के कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में रामनगर के कद्दावर नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी की एंट्री अटक गई। हरीश रावत उन्हें पार्टी में लाकर रामनगर में कांग्रेस का जनाधार मजबूत करना चाहते थे। नेगी ने खुद को जन्मजात कांग्रेसी बताया और रावत से मुलाकात भी की। लेकिन पार्टी के कुछ गुटों के विरोध के चलते मामला अटक गया। नाराज हरीश रावत ने 15 दिन का राजनीतिक अवकाश ले लिया और जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू कर दिए।
भाजपा नेता अब इस घटना को कांग्रेस की गुटबाजी बताकर प्रचारित कर रहे हैं। कुछ नेता लिख रहे हैं कि हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता का अपमान कांग्रेस के लिए घातक है।
हरीश रावत का तीखा जवाब
हरीश रावत ने पहले भी मुस्लिम यूनिवर्सिटी मामले में भाजपा पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा वाले इस मुद्दे का ताबीज बनाकर गले में डाल लें। अब भाजपा की अचानक हमदर्दी पर कांग्रेस कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं — “जब चुनाव में बदनाम किया, तब कहाँ थी हमदर्दी?”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा जानती है कि हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस की मजबूत कड़ी हैं। उनका जनाधार अभी भी काफी है। इसलिए कांग्रेस की कमजोरी को हवा देकर फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन वही भाजपा आज हरीश रावत को अपनी तरफ लाने का सपना भी नहीं देख सकती।
“बोया पेड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का, तो हरीश रावत जैसा जनाधार वाला नेता कहाँ से मिलेगा?” — यह तंज अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच खूब चल रहा है।

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