Home देहरादून दिव्यांशु हत्याकांड: किसान यूनियन का प्रदर्शन तेज, राकेश टिकैत पहुंचे देहरादून — न्याय पंचायत का आह्वान
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दिव्यांशु हत्याकांड: किसान यूनियन का प्रदर्शन तेज, राकेश टिकैत पहुंचे देहरादून — न्याय पंचायत का आह्वान

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देहरादून। मुजफ्फरनगर के बीटेक छात्र दिव्यांशु जटराना की प्रेमनगर क्षेत्र में 23 मार्च 2026 को हुई निर्मम हत्या के मामले में अब आक्रोश पूरे क्षेत्र में फैल गया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और जाट समाज के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत आज देहरादून पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल हुए और न्याय पंचायत का बड़ा आह्वान किया है।
शुक्रवार 3 अप्रैल को देहरादून-सहारनपुर बॉर्डर पर स्थित आशारोड़ी चेकपोस्ट पर किसानों की महापंचायत आयोजित की गई। राकेश टिकैत ने इस दौरान उत्तराखंड प्रशासन पर यूपी के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देहरादून में नशे का कारोबार खुलेआम बढ़ रहा है, जिसकी वजह से छात्रों की जान जा रही है। टिकैत ने मांग की कि सभी फरार आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
घटना की याद
23 मार्च की रात प्रेमनगर के केहरी गांव में दो छात्र गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में दिव्यांशु (22 वर्ष) को रॉड, हॉकी स्टिक और फावड़े से बुरी तरह पीटा गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सात अन्य फरार हैं। फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। कई आरोपियों के बिहार पहुंचने की भी खबर है।
किसानों का गुस्सा
दिव्यांशु जाट समुदाय से थे। हत्या के बाद मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और देहरादून में जाट समाज और किसान संगठनों में भारी आक्रोश है। राकेश टिकैत ने इसे केवल एक छात्र विवाद नहीं, बल्कि नशे और गुंडागर्दी के खिलाफ बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, “देहरादून शिक्षा का केंद्र है, लेकिन यहां पढ़ने आने वाले यूपी-बिहार के छात्रों की सुरक्षा नहीं है। नशा और वर्चस्व की लड़ाई युवाओं का भविष्य खा रही है।”
किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस जल्दी कार्रवाई नहीं करती तो आंदोलन और तेज होगा। 3 अप्रैल की महापंचायत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रशासन की तैयारी
देहरादून पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। एसएसपी कार्यालय के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है, लेकिन किसान नेता इसे पर्याप्त नहीं मान रहे।
दिव्यांशु हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है। यह छात्र सुरक्षा, नशा मुक्ति और क्षेत्रीय भेदभाव का बड़ा मुद्दा बन गया है। राकेश टिकैत जैसे प्रभावशाली नेता के शामिल होने से आंदोलन को नया आयाम मिल गया है।

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