नई दिल्ली। दुनिया और खुद पाकिस्तानी इसको इस्लामाबाद का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं। और यह भी तय माना जाना चाहिए कि यह सब अमेरिका की जानकारी में है। पाकिस्तान अभी तक केवल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ही नहीं करा रहा था, आज इस्लामाबाद ने एक ओर बड़ा काम किया। ईरान के लिए पाकिस्तान ने ‘ट्रांज़िट ऑफ़ गुड्स थ्रू पाकिस्तान’, यानि पाकिस्तान ने ईरानी उत्पादों के व्यापार के लिए छह कॉरिडोर खोले, यूएस का रिएक्शन नहीं मिला है। लेकिन यह तय माना जा रहा है कि अमेरिका की हां के बगैर पाकिस्तान इतना बड़ा फैसला लेने का जोखिम मोल नहीं लेगा। दरअसल बंदरगाहों की घेराबंदी के बाद ईरान को वाणिज्यिक मुसीबतों का सामना करना पड़ा रहा था, लेकिन अब ‘ट्रांज़िट ऑफ़ गुड्स थ्रू पाकिस्तान’,उसकी राहें आसान मानी जा रही हैं।
बताया गया है कि कुछ छह इलाके से होकर ऐसे कॉरिडोर बनाए गए हैं जो दूसरे देशों से होकर पाकिस्तान पहुंचते हैं और आगे फिर ईरान से मिल जाते हैं। पाकिस्तान की ओर से यह एलान ईरान के लिए काफी खास मायने रखता है। वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद के इस एलान के बाद ईरान को अपनी स्थिति सुधारने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
28 फरवरी को ईरान से लड़ाई का जोखिम मोल लेने के बाद जहां तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास विकल्प का सवाल है तो वह लगातार कम होते जा रहे हैं। अमेरिका जितनी सख्ती हमले और दूसरे रास्ते ईरान को अंडर प्रेशर लाने के लिए अपना सकता था अपना चुका है। अब हालत यह है कि खुद अमेरिका अंडर प्रेशर नजर आ रहा है। यहां तक कि ईरान अपनी शर्तों पर बातचीत की बात कह रहा है। हालांकि ट्रंप उसके लिए भी रानी हैं। यह बात अलग है कि कुछ मुद्दों की वजह से यह बातचीत नहीं हो पा रही है।दरअसल चीन और रूस से ईरानी की नजदीकियों के बाद मिडिल ईस्ट में काफी चीजें बदल गयी हैं। किम जोन उन पहले ही कह चुके हैं कि वो ईरान के साथ हैं।
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