विक्रम श्रीवास्तव
देहरादून, : उत्तराखंड में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की कमी ने गंभीर रूप ले लिया है। कच्चे माल के समय पर न मिलने के कारण वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन की उपलब्धता पर असर पड़ा है। डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से वैक्सीन की कमी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, कच्चे माल की अनुपलब्धता के चलते उत्पादन धीमा पड़ गया है। इसका सीधा प्रभाव सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ रहा है, जहां डॉग बाइट के मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिल पा रही है।
दून मेडिकल कॉलेज (DMC) की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक गीता जैन ने बताया, “हमारे यहां एंटी-रेबीज वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है और आने वाले सभी मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है। इमरजेंसी मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, अन्य सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन न मिलने के कारण यहां मरीजों की संख्या थोड़ी बढ़ गई है।”
अन्य अस्पतालों की स्थिति
दून मेडिकल कॉलेज को छोड़कर कई अन्य सरकारी अस्पतालों जैसे कोरोनेशन अस्पताल, प्रेमनगर उपजिला चिकित्सालय और रायपुर सीएचसी आदि में वैक्सीन की कमी की शिकायतें मिल रही हैं। मरीजों को वैक्सीन के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ रहा है, जिससे समय पर उपचार प्रभावित हो रहा है।
रेबीज एक घातक बीमारी है और काटने के बाद समय पर वैक्सीन न लगने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में वैक्सीन की निरंतर उपलब्धता बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष:
दून मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल गीता जैन का कहना है कि राज्य स्तर पर सप्लाई में कुछ दिक्कतें आई हैं, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर खरीदारी की जा रही है।
यह संकट प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के साथ और गंभीर हो गया है। आमजन अब स्वास्थ्य विभाग से जल्दी से जल्दी वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं
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