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डीएम, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट कमेटी में फिर भी बदहाल

डीएम, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट कमेटी में फिर भी बदहाल

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डीएम, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट कमेटी में फिर भी बदहाल
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सब्जी मंड़ी 42 दुकानदार 34 सालों से भर रहे हैं बंद दुकानों का किराया, दुकानों के बगल में बन गया है कूड़े कचरे का पहाड़, निगम हर साल लेता 18 लाख हाउस टैक्स सुविधा एक पाई की नहीं, दो बार सीएम योगी से भी फरियाद सुनवाई फिर भी नहीं

मेरठ। मंड़ी समिति की कमेटी में डीएम, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट और डीडीओ सरीखे अफसर उसके बाद भी लावारिस। यहां की समस्याओं के चलते अब हालत यह हो गयी है कि मंड़ी के कारोबार पर असर पड़ने लगा है। फल मंड़ी समेत नवीन मंड़ी परिसर में सात अलग-अलग प्रकार की मंड़ियां लगती हैं। इनमें सब्जी मंड़ी और अनाज मंड़ी भी शामिल हैं। साल 1986 में नवीन मंड़ी अस्तित्व में आयी थी। पूरे महानगर के सब्जी, अनाज और इससे मिलते जुलते तमाम कारोबारियों को यहां जगह दी गयी थी। सरकार ने ऐसा इसलिए किया था ताकि कारोबारियों और खरीदारों दोनों को सुविधा मिल सके, लेकिन सुविधा देने के नाम पर बनायी गयी नवीन मंड़ी को आज सबसे ज्यादा दरकार सुविवधाओं की है।

समस्याओं का अंबार

नवीन मंड़ी स्थल में कारोबार करने वालों की यदि बात करें तो फ्रूट मंड़ी के अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा बताते हैं कि यहां हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कारोबार से ज्यादा समस्याएं हो गयी हैं। वो बताते हैं कि एक समस्या हो तो गिनाएं यहां तो सिर्फ और सिर्फ समस्याएं ही समस्याएं हैं। सबसे बड़ी समस्या यहां गंदगी की है। गंदगी की बात की जाए तो मंड़ी के बैकसाइड में कूड़े चचरे का पहाड़ बनता जा रहा है। यहां से दिन भर सड़ांध उठती है, ऐसा लगता है मानों कोई मरा हुआ पशु फैंक दिया हो। सांस लेना दुर्भर हो जाता है। इन दिनों मानसून सक्रिय है। बारिश के मौसम में तो यहां के हालात और भी ज्यादा खराब हो गए हैं। मंड़ी की दीवार के पीछे जहां रेलवे का प्लेट फार्म है, वहां से दीवार टूटी हुई है। पिछले की आबादी ने उस टूटी दीवार को अब जाने जाने का रास्ता बना लिया है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हालात इतनी गंभीर है कि यहां से आवाजाही के चलते अब कूड़े का पहाड़ आम रास्ते में तब्दील होता जा रहा है, जबकि मंड़ी खासतौर से फ्रूट मंड़ी के कारोबारी इस कूड़े के पहाड़ से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा बताते हैं कि कूड़े के पहाड़ की इस मुसीबत से छूटकारा पाने के लिए जितना किया जाना चाहिए उससे ज्यादा कोशिश कर चुके हैं। समस्या से जहां तक अवगत कराए जाने का सवाल है तो लखनऊ जाकर जनता दरबार में दो बार सीएम योगी को समस्या से अवगत कराया चुका है। इसके अलावा मंडलायुक्त, जिलधिकारी और मंड़ी सचिव कुलदीप सैनी समेत जितने भी अफसर हैं सभी से समस्याओं के समाधान की फरियाद अब तक की जा चुकी है, अब तो हालत यह है कि थक-हार कर यहां की समस्याओं को अपना कारोबारी नसीब मानकर चुप बैठ गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि करें तो क्या करें जाए तो कहां जाएं, फरियाद करें तो किससे करें, जब सीएम योगी से फरियाद के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो अब तो केवल पीएमओ में गुहार लगाना बाकि रह गया है। मौका मिलेगा तो एक दिन पीएम मोदी से भी यहां के कारोबारी फरियाद लगाने को पीएमओ जाएंगे।

अफसरों को मंत्री का भी नहीं लिहाज

फ्रूट मंड़ी समेत पूरा नवीन मंड़ी स्थल महानगर की दक्षिण विधानसभा क्षेत्र मे आता है। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से डा. सोमेन्द्र तोमर विधायक और स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्र का दर्जा उन्हें हासिल है। स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के बाद भी समस्या को जो अफसर हल कर सकते हैं वो गंभीर नहीं। अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा बताते हैं कि डा. साेमेन्द्र तोमर काे भी यहां के कारोबारियों को उठानी मुसीबत से अवगत कराया जा चुका है लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब हालत यह हो गयी है कि गंदगी और टूटी सड़क की समस्या की वजह से कारोबार पर भी बुरा असर पड़ने लगा है। मंड़ी के गेट की रोड पूरी तरह से डेमेज हो चुकी है। गेट के पास ही सीवर खुला हुआ है। उस पर ढक्कन तक नहीं है। खुले हुए सीवर में कई बार वाहन गिरने की वजह से लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। भारत भूषण शर्मा बताते हैं कि यहां के कारोबारी किसी भी सूरत में कूड़े के पहाड़, टूटी हुई रोड, खुले हुए सीवर और बंद स्ट्रीट लाइलों की समस्या से निजात चहते हैं। इसके लिए वो कुछ भी करने और किसी से भी फरियाद को तैयार हैं, लेकिन कुछ भी कर इन समस्याओं का समाधान हाेना चाहिए। कारोबारियों ने बताया कि इस वार्ड से भाजपा की पूनम गुप्ता नगर निगम पार्षद हैं। यूपी में भाजपा की सरकार नगर निगम में महापौर भाजपा के और वार्ड से पार्षद भी भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार मिलकर भी यहां की समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में कारोबारी बस बेबस होकर रह गए हैं।
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