ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, आस्ट्रेलिया के अलावा कई यूरोपियन देशों ने भी दी मान्यता, भारत पहले ही दे चुका है फिलिस्तीन को राज्य की मान्यता
नई दिल्ली। फिलिस्तीन पर आसमान से मौत बरसाने के बाद भी इजरायल कुछ हासिल नहीं कर सका है, बल्कि इससे उसको नुकसान हुआ है। फिलिस्तनी के मुददे पर अब दुनिया के देशों के बीच इजरायल पूरी तरह से अकेला पड़ गया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के 193 सदस्य देशों में से 150 से अधिक देश अब तक फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य (स्टेट) के रूप में मान्यता दे चुके हैं। सितंबर 2025 में हुए ऐतिहासिक कूटनीतिक बदलावों के बाद दुनिया के कई बड़े पश्चिमी देशों ने भी फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है। भारत दुनिया के उन शुरुआती गैर-अरब देशों में से एक है जिसने 18 नवंबर 1988 को फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी थी। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, कतर और ओमान सहित लगभग सभी अरब और इस्लामिक राष्ट्रों ने इसे बहुत पहले ही मान्यता दी हुई है।
दुनिया फिलिस्तीन के साथ
दुनिया के तमाम देशों ने फिलिस्तीन का साथ पहले से ही दिया हुआ है। इनमें अफ्रीका के 54 देशों में से इरीट्रिया और कैमरून को छोड़कर बाकी सभी 52 देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है। इसमें दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और अल्जीरिया जैसे बड़े देश शामिल हैं। इनके अलावा लैटिन अमेरिका के देश ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको, चिली, वेनेजुएला और क्यूबा सहित अधिकांश दक्षिण अमेरिकी देश फिलिस्तीन को मान्यता देते हैं।
बदल रहा है अमेरिका का रवैया
इज़रायल का सबसे बड़ा मददगार अमेरिका भी अब पूरी तरह उसके हर फैसले के साथ नहीं है। हालांकि अमेरिका इज़रायल को सैन्य सहायता दे रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ गाजा शांति योजना, लेबनान में बमबारी और हमास के निरस्त्रीकरण के तरीकों को लेकर इज़रायल के गहरे मतभेद और तनाव सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा इज़राइली नेतृत्व के खिलाफ जारी किए गए वारंट के कारण इज़राइली अधिकारियों के लिए दुनिया के कई देशों की यात्रा करना असंभव हो गया है। इजरायल के प्रेशर में जिन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता नहीं दी उनमें अमेरिका के अलावा जर्मनी, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रिया और डेनमार्क जैसे देश हैं।
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