पीड़ितों की ओर से सरकार या फिर अफसरों से मांगें, सरकार के साथ अफसरों पर वार कैसे संभव
मेरठ। मेरठ व्यापार मंडल के शहर अध्यक्ष शैंकी वर्मा ने उल्देपुर में धरने के दौरान दिए गए बयान पर रविन्द्र गुर्जर से सवाल किया है कि उनकी लड़ाई किस के साथ है। दरअसल बयान में रविन्द्र गुर्जर कह रहे हैं कि उनकी लड़ाई सरकार से नहीं अफसरों से है। इसी को लेकर उनसे सवाल पूछा जा रहा है और यह भी कहा जा रहा है कि अफसर भी तो वही करते हैं जो सरकार चाहती और कहती है। शैंकी वर्मा का कहना है कि उल्देपुर में चल रहे आंदोलन में रविंद्र गुर्जर द्वारा अधिकारियों को लेकर दिए गए कथित धमकी भरे बयान की हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। आंदोलन और जनहित के मुद्दों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा अथवा फंसीं पर चढ़ा देंगे जैसी भाषा का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं हो सकता।
सीधा सवाल
सीधा सवाल है कि यदि उन्हें यह विश्वास है कि प्रशासन और सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती, तो वह जनता को बताएं कि यह विश्वास उन्हें किस आधार पर है? क्या शासन या प्रशासन के किसी जिम्मेदार अधिकारी से इस संबंध में उनकी कोई बातचीत या आश्वासन हुआ है। जब वह सार्वजनिक मंचों पर कहते हैं कि वे जनप्रतिनिधियों और सरकार के बारे में कुछ नहीं बोलेंगे, तो फिर उनके आंदोलन की वास्तविक मांग किससे है। क्योंकि 2 तारीख के आंदोलन में भी उन्होंने हमें यही कह दिया था कि आप सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलना जिस कारण से हमने माइक तक नहीं पकड़ा था, क्या आंदोलन अधिकारियों के खिलाफ है, शासन के खिलाफ है या किसी विशेष व्यक्ति या सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ यह साफ किया जाना जरूरी है। शैंकी वर्मा का कहना है कि वो कौन अधिकारी है जो सरकार को बदनाम कर रहे हैं। हम उनसे कहते हैं कि जो अधिकारी उनकी सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं उन अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक करें और जब सरकार उनकी है तो उन अधिकारियों पर कार्यवाही करवाये। जनता संघर्ष करने के लिए तैयार है, लेकिन संघर्ष संविधान और कानून के दायरे में ही किया जाये।
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