पाकिस्तानी युवा भी चाहते हैं कॉक्राेच सरीखा आंदोलन
पाकिस्तानी युवा भी चाहते हैं कॉक्राेच सरीखा आंदोलन
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लाहौर के युवक काशिक्षा सुधार और पेपर लीक के खिलाफ चलाए जा रहे सीजेपी के आंदोलन के मार्मिक समर्थन, सूर्यकांत का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। भाजपा और उनके समर्थक पेपर लीक का विरोध और शिक्षा में सुधार का बीड़ा उठा कर आंदोलन कर रहे सीजेपी को भले ही बुरा भला कहते हों, लेकिन सीमा पार यानि पड़ौसी मुल्क के युवा सीजेपी को आदर के भाव से देखते हैं। वो सीजेपी के लिए किस प्रकार की फिलंग रखते हैं इसका खुलासा लाहौर से अभिजीत दीपके के लिए आयी चिट्ठी से हुआ है। इस चिट्टी में सीजेआई के कॉक्राेच कहने का भी जिक्र किया गया है। चिट्टी खिलने वाले का कहना है कि वो और पाकिस्तान के दूसरे युवा उन्हें उम्मीद से देख रहे हैं।
जैसी दिल्ली वैसा लाहौर
लाहौर के रहने वाले एहतेशाम हसन ने ‘स्क्रॉल’ में लिखा है ‘डियर अभिजीत, मैं आपको लाहौर से लिख रहा हूं। एक ऐसा शहर जहां की हवा वैसी ही धूल भरी है जैसी दिल्ली की। मैं यहां एक युवा कार्यकर्ता हूं। उस पीढ़ी का हिस्सा जो सरहद की लंबी और डगमगाती परछाई में पली-बढ़ी है। मैं आपको इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि लंबे समय बाद सरहद के उस पार से आई खबरों को देखकर ऐसा लगा मानो मैं आईने में खुद को देख रहा हूं।’ खत में आगे लिखा है ‘जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने युवा और बेरोजगार लोगों के लिए कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया तो पाकिस्तान में मेरे जानने वाले युवाओं ने उस शब्द को तुरंत पहचान लिया। दक्षिण एशिया में ताकतवर लोग हम जैसे लाखों लोगों को इसी नजर से देखते हैं। वे लोग जो ‘फालतू’ समझे जाते हैं बिना नौकरी वाले ग्रेजुएट वे छात्र जिनके सपने लीक हुए एग्जाम पेपर में बिक जाते हैं और वे युवा जिनसे उम्मीद की जाती है कि वे जो कुछ भी थोड़ा-बहुत मिले उसी में शुक्रगुजार रहें।’ उन्होंने आगे लिखा ‘अपने आंदोलन का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखकर आपने आप पर फेंके गए पत्थर का इस्तेमाल घर बनाने के लिए किया।’
एक सी है दोनों मुल्कों की कहानी
एहतेशाम हसन लिखते हैं ‘लाहौर में हमें अक्सर ऐसा लगता है कि हम आपके विरोध-प्रदर्शन के ही एक शांत रूप में जी रहे हैं। हमारा संघर्ष एक जैसा है। मेडिकल और डेंटल कॉलेज एडमिशन टेस्ट के घोटाले आपके उस संकट की याद दिलाते हैं जिसमें नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का पेपर लीक हो गया था। हमारे परिवार भी कोचिंग सेंटरों के लिए भारी कर्ज में डूब जाते हैं और हमारी युवा आबादी भी अब एक बोझ बनती जा रही है। लेकिन पाकिस्तान में कभी-कभी माहौल थोड़ा ज्यादा भारी लगता है।’
‘पाकिस्तान में परीक्षा पेपर लीक होना आम बात’
एहतेशाम हसन ने लिखा है ‘परीक्षा के पेपर लीक होना तो बस एक छोटी सी बात है। अगर हम व्यापक नजरिए से देखें तो हम सभी को एक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे कि बेरोजगारी, गरीबी और सीमाओं के आर-पार जीवन-स्तर का खराब होना। आपका विरोध-प्रदर्शन हममें से लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद और ताजगी भरा है।’ आगे लिखा है ‘औपनिवेशिक शासन से मिली हमारी सामूहिक आजादी के बारे में फिर से सोचने के लिए अगस्त से बेहतर कोई महीना नहीं हो सकता। 1947 के बंटवारे में हमने लाखों लोगों को खो दिया। लेकिन अगर आजादी के 80 साल बाद भी हममें से लाखों लोगों के पास जिंदगी की बुनियादी चीजें नहीं हैं तो हमने क्या हासिल किया?’
कॉक्रोच शब्द को पहचानने में नहीं की देरी
खत में आगे लिखा है ‘जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने युवा और बेरोजगार लोगों के लिए कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया तो पाकिस्तान में मेरे जानने वाले युवाओं ने उस शब्द को तुरंत पहचान लिया। दक्षिण एशिया में ताकतवर लोग हम जैसे लाखों लोगों को इसी नजर से देखते हैं।’
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