बोम्बे हाईकोर्ट का रेस्टोरेंट संचालक को किसी भी प्रकार की रियायत देने से साफ इंकार, एफडीए चीफ तुकाराम मुंढे के एक्शन की गूंज
नई दिल्ली/मुंबई। प्रतिबंधित होते हुए भी एनलॉग पनीर ग्राहकों को खिलाने वाले रेस्टोरेंट की मुश्किलें बढ़ गयी हैं। बोम्बे हाईकोर्ट ने इस रेस्टोरेंट के संचालकों को किसी प्रका की राहत देने से साफ इंकार किया है। महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर परोसने पर सरकार ने रोक लगायी हुई है। एफडीए चीफ की पहल पर ही यह कार्रवाई हुई है। यहां बता दें कि जिस पनीर की बात की जा रही है वो जहर से किसी भी प्रकार कम नही है। गौरतलब है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं और खाद्य सुरक्षा नियमों के व्यापक उल्लंघन को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ‘एनालॉग’ या नकली गैर-डेयरी पनीर के निर्माण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था. इसके साथ ही कई राज्यों ने अभी अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया है.
यह से कम नहीं एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर एक कृत्रिम यानि आर्टिफिशल या सिंथेटिक उत्पाद है जो दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा होता है लेकिन इसे दूध की बजाए वनस्पति तेल जैसे पाम ऑयल, स्टार्च और अन्य सेहत के लिए घातक तत्वों से तैयार किया जाता है। यह काफी सस्ता होता है और इसकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है, इसलिए इसका उपयोग अक्सर रेस्टोरेंट और ढाबों में किया जाता है।
योगी सरकार ने भी लगाया है प्रतिबंध
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इसमें पनीर भी शामिल है।बता दें कि सबसे पहले महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में बैन एनालॉग प्रोडक्ट बैन हुए, अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है। सरकार ने यह फैसला आमजन के हित में लिया है, लेकिन इस हानिकारक एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के बारे में लोगों को सीमित जानकारी ही है।
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