राहत के लिए डाक्टरो को भाजपा के दमदार नेताओ की तलाश
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आवास विकास के करीब दो दर्जन नर्सिंगहोम को नोटिस, सुप्रीमकोर्ट में 12 अगस्त की सुनवाई के बाद राहत के दावे झूठे हुए साबित
नर्सिंगहोम संचालकों की कारगुजारी की कीमत चुकाएंगे मरीज, भाजपा नेताओं की शरण और कानूनी लड़ाई की तैयारी
मेरठ। सुप्रीमकोर्ट में 12 अगस्त को हुई सुनवाई में राहत के दावे थोथे साबित हुए। राहत के दावों के बाद शासत्रीनगर सेंट्रल मार्केट में जश्न मनाने वाले खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वो मान रहे हैं कि सुप्रीम आदेश काे समझने में चूक हुई है। हालांकि राहत के नाम पर अब तक चंदे के रूप में जमा की गयी करोड़ से ज्यादा रकम खर्च की जा चुकी है। कुछ ऐसे भी हैं जो अपने पैसे वापस मांग रहे हैं। लेकिन इससे भी आगे जो अब होनेा जा रहा है वो बेहद मुश्किल भरा है। अवैध रूप से संचालित हो रहे करीब दो दर्जन नर्सिंगहोम व हास्पिटल पर आवास विकास की ध्वस्तीकरण की तलवार लट गयी है। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर ऐसे नर्सिंगहोम व हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
खंगाले जा रहे भाजपाई कनेक्शन
नोटिस चस्पा होने के बाद प्रभावशाली नर्सिंगहोम संचालकों नेक अपने भाजपाई कनेक्शनों को खंगालना शुरू कर दिया है। पता चला है कि नई दिल्ली स्थित भाजपा के एक बड़े नेता से मुलाकात की गयी है। इसके अलावा इस आफत को टालने के लिए कानूनी राय भी ली जा रही है। वहीं दूसरी ओर नर्सिंगहोम संचालकों ने अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ बैकडोर से मेरठ में भी भाजपा नेताओं की परिक्रमा शुरू कर दी है। हालांकि यह साफ नहीं कि भाजपा नेताओं से इन्हें क्या आश्वासन मिला है या आश्वासन मिला भी है या नहीं।
वहीं दूसरी ओर जिन्हें नोटिस दिए गए हैं उनमें अर्जुन हॉस्पिटल, अर्जुन मेमोरियल एंड मल्टी स्पेशियलिटी, जीवन ज्योति नर्सिंग होम, कैपिटल हॉस्पिटल, विकास गर्ग नर्सिंग होम, सुनीता नर्सिंग होम, जगदंबा हॉस्पिटल, संतोष हॉस्पिटल, एमसीसी हॉस्पिटल, डॉ. यूनूस नर्सिंग होम, सुशील नर्सिंग होम, ब्लासम नर्सिंग होम, एसएम हॉस्पिटल, वेदांत हॉस्पिटल, अग्रवाल नर्सिंग होम, शिवम नर्सिंग होम, उपाध्याय नर्सिंग होम, आनंदित नर्सिंग होम, अंबे नर्सिंग होम और प्रेम नर्सिंग होम आदि अस्पताल शामिल हैं। इनके अलावा कई अन्य नर्सिंग अभी आवास विकास के रडार पर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे नर्सिंगहोम के लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी कर ली है। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में तेज कर दी है। शास्त्रीनगर, जागृति विहार और माधवपुरम समेत आवासीय योजनाओं में सर्वे कराया जा रहा है। इसी क्रम में नगर योजना संख्या-3 यानी शास्त्रीनगर में आवासीय भूखंडों पर संचालितअस्पतालों और नर्सिंग होम को नोटिस जारी किए गए हैं।
एक सप्ताह की मोहलत
इन अस्पताल संचालकों को एक सप्ताह के भीतर मरीजों को अन्यत्र शिफ्ट कर भवन खाली करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर अस्पतालों को सील करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संबंधित अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त करने की पैरवी भी की गई है। नोटिस मिलने के बाद मंगलवार को कई अस्पताल संचालक आवास एवं विकास परिषद के कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया। संचालकों ने अधिकारियों के सामने सवाल उठाया कि अस्पताल बंद होने की स्थिति में भर्ती मरीजों को अचानक कहां ले जाया जाएगा। उनका कहना था कि गंभीर मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करने से उनकी जान को खतरा हो सकता है।
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