लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अफसरों की नींद नहीं टूटी तो पूरे सिस्टम की नींद उड़ाएंगे एल्फा
मेरठ। पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर अपनी एकजुटता का लोहा मनवा चुके टीम कॉकाेच के एक्टिविस्टस्ट अब बेसिक शिक्षा की बेपटरी व्यवस्था के सुधार का बीड़ा उठाने पर तुले हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘जेन अल्फा’ (Generation Alpha) यानी नई पीढ़ी के स्कूली छात्र बुनियादी शिक्षा सुविधाओं, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, साफ-सुथरे शौचालयों, पीने के पानी और बेहतर माहौल की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जनपद के तमाम इलाकों में टीम कॉक्रोच के वॉलिएंटर दूरदराज के गांव के इलाकों में पहुंचे रहे हैं। बहां के स्कूलों की कैसी हालात है और वहां टीचरों की स्थिति क्या इन तमाम चीजों को लेकर डेटा जुटाया जा रहा है। इसीक्रम में टीम काॅक्रोच के सदस्य लोहियानगर के बटोज, जुर्रानपुर और पूर्व सांसद राजेन्द्र अग्रवाल के इलाके चाणक्यपुरी स्थित बेसिक के स्कूलों को देखने पहुंचे। इस टीम की अगुवाई आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट आदेश प्रधान कर रहे थे। उनके कई साथी इस टीम का हिस्सा रहे। यहां बता दें कि केवल यूपी नहीं देश के कई राज्यों में स्कूली शिक्षा को लेकर एल्फा सड़कों पर हैं। उनका कहना है कि शिक्षा उनको संविधान प्रदत्त अधिकार है और सरकार चलाने वाले के लिए कर्तव्य। पांचली गांव की बेटियों ने सीधे डीएम मेरठ से पूछा है कि रास्ते में पानी भरा हुआ है वो स्कूल जाए तो जाएं कैसे।
जहां भी गए वही बदहाली
टीम काॅक्रोच जिन जिन स्कूलों में पहुंची उनकी हालत बद से बदत्तर थी। स्कूलों में सबसे शिक्षा के साथ सबसे ज्यादा अनिवार्य व्यवस्था टॉयलेट बदहाल मिले। लोहिया नगर स्थित सरकारी स्कूल जो कक्षा पांच तक है उसमें इतने भी कमरे नहीं है कि वहां सभी बच्चों को बैठाया जा सके। जब स्कूल में बच्चों के लिए कक्षा ही नहीं होंगी तो वहां कैसी पढ़ाई करायी जा रही होगी। वहां बच्चे क्या पढ़ रहे होंगे और टीचर बगैर कक्षा में इन बच्चों को फिर कहां पढ़ा रहे होंगे। गांव में आमतौर पर बिजली आपूर्ति शहरी क्षेत्र के अनुपात में बहुत कम की जाती है। इसलिए जिस स्कूल का यहां जिक्र किया जा रहा है उसमें सोलर पैनल लगवाया गया था ताकि बिजली ना होने की स्थिति में टीचरों को असुविधा ना हो, लेकिन यह सोलर पैनल अरसे से खराब है। जान लेवा गर्मी और उसम भरे मौसम में बगैर लाइट ना तो बच्चे पढ़ सकते हैं और टीचर इतनी उमस और अंधेरी कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने में कोई रुचि लेंगे इसका यकीन नहीं होता। स्कूल की हालत देखकर लगता था कि इसको रंगाई पुताई की दरकार है। अरसे से इसकी मरम्मत और रंगाई पुताई नहीं करायी जा सकी है। टी कॉक्रोच के एडवोकेट अनुज और उनके साथी इन्हीं खामियों को तलाशने पहुंचे थे। उनका एक ही मकसद है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए।
टॉयलेट है लेकिन तालों में बंद
टीम काक्राॅच जब जुर्रानपुर से बजोट गांव में स्थित कक्षा पांच की पाठशाला में पहुंची तो उनकी नजर सबसे पहले वहां के टॉयलेट पर पड़ी। टॉयलेट पर ताले झूल रहे थे, ऐसा लगा कि यहां बच्चों को टॉयलेट यूज करने की अनुमति नहीं दी गयी है। टॉयलेट के लिए संभवत: उन्हें खुले में पास की झाड़ियों में संभवत जाना होता होगा। टॉयलेट की समस्या आमतौर पर स्कूलों में कॉमन होती जा रही है। टीम कॉक्रोच ने बताया कि उन्हें बताया गया कि स्कूल में लगभग चालिस बच्चे हैं। बच्चो की कम संख्या को लेकर प्रधानाचार्य कोई माकूल जवाब नहीं दे सके। गांव वालों की मानें तो यह स्कूल स्वतंत्र प्रभारी राज्यमंत्री ने गोद लिया हुआ है। हालांकि स्कूल के स्टाफ या प्रधानाचार्य ने इसकी पुष्टि नहीं की।
फर्नीचर की भारी किल्लत
तीसरे जिस स्कूल में टीम काक्राॅच पहुंची वो है चाणक्यपुरी स्थित प्राइमरी पाठशाला। इन दिनों बारिश का मौसम है और स्कूल परिसर में लंबी-लंबी घास और झाड़ियां उगी हैं। गर्मी और उमस के मौसम में प्यास अधिक लगती है लेकिन यहां का वाटर कूलर खराब बताया गया है। इसके अलावा फर्नीचर का भारी टोटा है। फर्नीचर पूरी तरह से डेमेज हैं। जब कक्षाओं में फर्नीचर मसलन बच्चों के लिए मेज कुर्सी ही नहीं होंगी तो लाजमी है कि उन्हें जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता होगा। यूपी की शिक्षा व्यवस्था खासतौर से बेसिक शिक्षा की इसको वानगी भर जा सकता है। सोशल मीडिया का जमाना है। हर कोई चाहे छोटा है या बड़ा वो साेशल मीडिया पर एक्टिव है। कक्षा एक से पांच तक की पाठशाला में पढ़ने वाले बच्चे सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं होंगे ऐसा सोचना नितांत मुर्खता होगी। बेसिक के से एल्फा शिक्षा की बदहाली को लेकर देश भर के एल्फा के द्वारा उठायी जा रही आवाजों से अंजाम नहीं है। इसी को लेकर माना जा रहा है कि मेरठ के एल्फा में भारी सुगबुगाहट है और रही सही कसर टीम कॉक्रोच एल्फा की आवाज बनकर सामने आने के बाद पूरी हाे गयी है।
खामियों का अंबार
सरकारी स्कूलों की बहाली ना तो सरकार से ना ही उनमें पढ़ाने वालों और ना ही उनसे जिनके बच्चे वहां पढ़ रहे हैं छिपी है। सिस्टम चलाने वाले भले ही अंजान बनते हों, लेकिन उन्हें इस खामी का पता नहीं इस बात पर यकीन करना मुश्किल है। खामियां की बात करें तो तमाम स्कूलों में रिक्त पड़े पदों के कारण नियमित और सुचारू कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। पीने का शुद्ध पानी, पंखे और स्वच्छ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और लचर शिक्षा प्रणाली के खिलाफ रोष। तीन दिन पहले लखनऊ में जेन अल्फा ने जोरदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया था। मेरठ में बेसिक शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं और स्कूलों की बदहाली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में सरूरपुर क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया, जहां छुट्टी के बाद एक छात्रा कक्षा में बंद रह गई थी। सरूरपुर ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में ताला लगने के बाद बच्ची के अंदर बंद रहने के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक को निलंबित किया गया। ई परिषदीय और पीएम श्री स्कूलों के आसपास गंदगी, जलभराव और उचित रखरखाव न होने की शिकायतें स्थानीय स्तर पर उठती रही हैं। जिले के देहात और कस्बा क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से बिना मान्यता के विद्यालय चलने के मामले भी उजागर हुए हैं।
यहां करें शिकायत
यदि आपके क्षेत्र में भी बेसिक शिक्षा से जुड़ा कोई स्कूल बदहाली या लापरवाही का शिकार है, तो आप उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14417 या 18003454417 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं या फिर 9997539259 पर कॉल कर सकते हैं।
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