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पचास हजार की आबादी की मुसीबतों से बेखबर अफसर

पचास हजार की आबादी की मुसीबतों से बेखबर अफसर

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पचास हजार की आबादी की मुसीबतों से बेखबर अफसर
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मेरठ। महानगर का नंगलाताशी इलाका नगर निगम अफसरों और जनप्रतिनिधियों खासकर जिन्हें अपना नुमाइंदा बनाकर इस वार्ड के लोगों ने नगर निगम भेजा उनकी बेरूखी के चलते समस्याओं से आबाद है। एक समस्या हो तो भी गनीमत थी। जब भी नगलाताशी का जिक्र आता है लोग कहते हैं कि यहां तो समस्याओं के अलावा कुछ दूसरा है ही नहीं। समस्या होना एक बात है और समस्याओं का समाधान ना करना या समाधान ना कराना पाना दूसरी बात है। कंकरखेड़ा से सटे नगलाताशी वार्ड 41 की आबादी करीब पचास हजार है। इस वार्ड में नंगलाताशी केअलावा श्रद्धापुरी और न्यू सैनिक कालोनी और इसकी उपबस्तियां शुमार की जाती हैं। पचास हजार की इस आबादी ने अपनी नुमाइंदगी सीमा प्रजापति को सौंपी, लेकिन यहां के लोगों की शिकायत है कि जिस हरसत की उम्मीद में सीमा प्रजापति को नुमाइंदगी सौंपी गयी वो पूरी नहीं हो सकी। उम्मीद की थी कि वार्ड की जो पुरानी समस्याएं है ऐसी समस्याएं जिन्हें जिदंगी का हिस्सा मनाने बैठे हैं सीमा प्रजापति उनसे मुक्ति दिला देंगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इस वार्ड के लोगों ने जो उम्मीद लगायी थी वो पूरी नहीं हुई और आगे भी उन्हें कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

 समस्याएं जिनका चाहते हैं समाधान

नंगलाताशी, श्रद्धापुरी और न्यू सैनिक कालोनी के लोगों की समस्याओं की बात करें तो यहां की मुख्य समस्याओं में वाटरटैक्स की वसूली के बाद भी नगर निगम प्रशासन पेयजलापूर्ति नहीं करा सका है। यह पूरा इलाका समरसेबल, हैंडपंप और निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। इसके लिए बिजली चाहिए होती है। पानी की जरूरत है और यदि बत्ती गुल है तो बैठे रहिये प्यासे और इंतजार में पानी नहीं मिलने वाला भले पूरा सप्ताह बीत जाए या महीना निकल जाए। पानी नहीं मिलेगा यदि बत्ती नहीं होगी। इसलिए लोग चाहते हैं कि नगर निगम प्रशासन की ओर पानी की लाइन डालकर सप्लाई की जाए या फिर टंकी के द्वारा इस इलाके की पानी की समस्या का समाधान किया जाए। बत्ती आएगी तभी पानी मिलेगा इस मुसीबत से उन्हें मुक्ति मिल सके। इसके अलावा इस पूरे इलाके में सबसे बड़ी समस्या साफ सफाई की नजर आती है। यहां नालियां जाम हैं और नियमित सफाई नहीं होती। शिकायत के बाद भी कोई सुनने को तैयार नहीं। सफाई करानी होती है तो आपस में चंदा जमा करते हैं।उसके बाद प्राइवेट सफाई कर्मचारियों को बुलाकर यहां सफाई करायी जाती है तब कहीं जागर नरक से पीछा छूटता है। कई गलियों की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। रात में खराब स्ट्रीट लाइटों के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यहां नियमित सफाई न होने से नालियां बंद हैं और बारिश में पानी भर जाता है। लोग घरों में कैद होकर रह जाते हैं। कई स्ट्रीट लाइट बंद हैं और बिजली के तार जर्जर हैं। हालांकि इसमें काफी काम पीवीवीएनएल को करना है लेकिन समस्या तो है। लोग बताते हैं कि स्कूल के सामने कूड़ाघर बना है। बच्चे बदबू और गंदगी के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। अम्हेड़ा रोड गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। आवारा पशु और कुत्ते लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। शिकायतें होती हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं। चुनाव खत्म होते ही नेता गायब हो जाते हैं। महानगर के इस इलाके में विकास के दावे जमीनी सच्चाई से कोसों दूर हैं।
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