Home मेरठ जान देने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने सीसीएसयू में जुटे स्टूडेंट
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जान देने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने सीसीएसयू में जुटे स्टूडेंट

जान देने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने सीसीएसयू में जुटे स्टूडेंट

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जान देने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने सीसीएसयू में जुटे स्टूडेंट
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मेरठ। नीट अभ्यार्थियों की आत्महत्या व लखनऊ आग हादसे में का शिकार हुए युवाओं को सीसीएसयू के गेट पर श्रद्धांजलि दी गयी। साथ ही सूबे की सरकार से मांग की गयी है कि इस प्रकार का माकूल और मुकम्मल इंतजाम किया जाए ताकि नीट ही नहीं कोई भी परीक्षा का पेपर लीक ना हो। कोई युवा मौत को गले ना लगाए। साथ ही लखनऊ कोचिंग सैंटर आग हादसे ना देाहराए जाएं। इसको लेकर भी योगी सरकार से पुख्ता इंतजाम की बात कही गयी है। नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्याओं एवं लखनऊ आग दुर्घटना में मृतकों को श्रद्धांजलि, छात्रों की समस्याओं पर उठी आवाज
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में सेंटर लाइबेरी के बाहर — लखनऊ में हुई दर्दनाक आग दुर्घटना तथा नीट परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े तनाव, अव्यवस्थाओं और मानसिक दबाव के कारण जान गंवाने वाले छात्र-छात्राओं को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं युवाओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उनके परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनियमितताओं, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव तथा कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, लेकिन उसकी समस्याओं को सुनने और समाधान करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। एडवोकेट आदेश प्रधान, अनुज भड़ाना, शशिकांत गौतम, आकाश भड़ाना, रोहित राणा, युधिष्ठिर भाटी, अभिषेक ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं दिखाई देता। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में यदि छात्र आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का भी संकेत है। आदेश प्रधान कहा कि नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और अव्यवस्थाओं ने देश के करोड़ों युवाओं का विश्वास प्रभावित किया है।

वक्ताओं ने कहा कि यदि लगातार छात्र तनाव, अवसाद और निराशा का शिकार हो रहे हैं तो सरकार और संबंधित संस्थाओं को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां कैसे बनीं। वक्ताओं ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। जब देशभर के छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, तब सरकार का दायित्व बनता है कि वह उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुने और समाधान प्रस्तुत करे।

कोचिंग सैंटर हादसे के लिए अफसर जिम्मेदार

लखनऊ में हाल ही में हुई आग दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऐसी घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की ओर संकेत करती हैं। किसी भी कोचिंग सेंटर, शैक्षणिक संस्थान या व्यावसायिक भवन में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। यदि किसी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन लखनऊ आग दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच कराए तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में संचालित कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक निरीक्षण किया जाए। केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी छात्र या नागरिक को अपनी जान न गंवानी पड़े। सभा में उपस्थित युवाओं ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि देश के भविष्य का निर्माण करने का साधन है। यदि छात्र स्वयं को असुरक्षित, उपेक्षित और निराश महसूस करेंगे तो इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। इसलिए सरकार, प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें छात्र बिना भय और दबाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। अंत में सभी ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में शिक्षा व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही छात्र-छात्राओं से अपील की गई कि वे किसी भी कठिन परिस्थिति में निराश न हों और अपनी समस्याओं को परिवार, मित्रों एवं संबंधित संस्थाओं के साथ साझा करें।

ये रहे मौजूद

युधिष्ठिर भाटी, आकाश भड़ाना, अभिषेक भाटी, कुलदीप, सरिता, अंकिता, अन्वी, शशिकांत गौतम, रोहित राणा, शान मोहम्मद, अरुण, संदीप, विपिन भड़ाना, निशु गुर्जर, डी.के. सिंह, नगेंद्र नागर, अनुज भड़ाना एवं एडवोकेट आदेश प्रधान दर्जनों मौजूद रहे।

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