मेरठ। निर्वाचित पार्षदों ने आज मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को नगरायुक्त को संबोधित ज्ञापन में नगर निगम में बदइंतजामी की पोल खोलकर रख दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम में जंगलराज सरीखे हालात हैं। यहां बगैर पैसे कोई काम नहीं हो रहा है। वाहन डिपो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। तमाम ऐसे लिपिक हैं जो सालों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। प्रशासनिक अनियमितताएं व्याप्त हैं। पब्लिक तो छोड़ों पार्षदों तक की सुनवाई नहीं। नगर निगम में बद इंतजामी का आरोप लगाते हुए तमाम पार्षदों ने आज नगरायुक्त को संबोधित ज्ञापन मुख्य कर निर्धारण अधिकारी शिव कुमार गौतम को सौंपा।
निगम पार्षद कीर्ति घोपला, भूपेन्द्र सिंह, प्रशांत कसाना, आशीष चौधरी आदि द्वारा ज्ञापन में पार्षदों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम में पिछले लंबे समय से कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों एवं बाबुओं द्वारा अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए कार्यों में अनावश्यक विलंब, भष्टाचार एवं जनता के उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। नगर निगम में आम नागरिकों के मूलभूत कार्य जैसे जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, गृहकर, व्यापार लाइसेंस, सफाई व्यवस्था, जल निकासी, एवं अन्य प्रशासनिक कार्य समयबद्ध तरीके से नहीं किए जा रहे हैं। जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तथा अनेक मामलों में बिना अवैध धनराशि दिए कार्य नहीं किए जाते। इससे आम नागरिकों में भारी असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
विशेष रूप से नगर निगम के तीनों वाहन डिपो में भी भारी अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वाहन संचालन, डीजल व्यय, वाहनों के रखरखाव, मरम्मत एवं अन्य व्यवस्थाओं में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। कई मामलों में वित्तीय अनियमितताओं एवं संसाधनों के दुरुपयोग की आशंकाएँ लगातार व्यक्त की जा रही हैं, जिससे नगर निगम की आर्थिक स्थिति एवं कार्यप्रणाली दोनों प्रभावित हो रही हैं। तीनों वाहन डिपो की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाना अत्यंत आवश्यक है।
आउटर के इलाकों में काम नहीं
इसके अतिरिक्त नगर निगम क्षेत्र में कराए जा रहे निर्माण कार्यों में भी संतुलन एवं आवश्यकता आधारित योजना का अभाव दिखाई देता है। वर्तमान में शहर के विकसित क्षेत्रों में लगातार निर्माण एवं सौंदयर्थीकरण कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि नगर निगम के आउटर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है। अनेक क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बनी रहती है, अधिकांश सड़कें जर्जर अथवा कच्ची स्थिति में हैं तथा श्मशान घाट, मरघट एवं कब्रिस्तानों जैसे अत्यंत आवश्यक सार्वजनिक स्थलों का समुचित विकास एवं निर्माण आज तक नहीं हो पाया है।
आवश्यक है कि नगर निगम द्वारा निर्माण कार्य कराए जाने से पूर्व संबंधित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए तथा आवश्यकता एवं जनहित के आधार पर निर्माण कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित की जाए। विशेष रूप से आउटर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु अलग से योजनाएँ एवं टेंडर प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि नगर निगम द्वारा मेरठ को महानगर के रूप में विकसित किए जाने के अभियान में इन उपेक्षित क्षेत्रों को भी समान रूप से जोड़ा जा सके।
सालों से एक ही सीट पर हैं जमे बाबू
यह भी संज्ञान में आया है कि कई बाबू एवं कर्मचारी वर्षों से एक ही पटल पर कार्यरत हैं, जिसके कारण विभागीय पारदर्शिता प्रभावित हो रही है तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। कुछ कर्मचारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ असहयोगात्मक एवं अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। हम सभी पार्षदगण एवं जागरूक नागरिक यह मानते हैं कि यदि समय रहते इस विषय पर कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो नगर निगम की छवि धूमिल होगी तथा जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से विश्वास समाप्त होता जाएगा।
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