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वित्त मंत्री के पति अर्थशास्त्री डॉ. प्रभाकर भी ज्ञानेश के खिलाफ

वित्त मंत्री के पति अर्थशास्त्री डॉ. प्रभाकर भी ज्ञानेश के खिलाफ

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वित्त मंत्री के पति अर्थशास्त्री डॉ. प्रभाकर भी ज्ञानेश के खिलाफ
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वित्त मंत्री के पति के ही सरकार विरोधी मंच पर आने से सत्ता में हड़कंप, विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका

नई दिल्ली। देश में मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर आज एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संग्राम छिड़ गया है। ‘पीपल्स अगेंस्ट SIR’ (People Against SIR) गठबंधन के बैनर तले आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और ‘पीपल्स मार्च टू रिस्टोर डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र की बहाली के लिए जन मार्च) का आयोजन किया गया है। इस आंदोलन ने उस समय सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया जब देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और अर्थशास्त्री डॉ. परकला प्रभाकर भी सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ इस मोर्चे में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए क्योंकि चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं।

देश की हर गली में जंतर मंतर

अर्थशास्त्री डा. परकला प्रभाकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए इस चुनौती को स्वीकार करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की है। आंदोलनकारियों ने इस देशव्यापी प्रदर्शन के लिए “हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर” का नारा दिया है। इस आंदोलन के चेहरों की यदि बात की जाए तो समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई बड़े नाम एक साथ एक मंच पर दिखाई दे रहे। इनमें डॉ. परकला प्रभाकर: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक टिप्पणीकार (वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति)। प्रकाश राज: जाने-माने अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता। अभिजीत दिपके: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक। प्रशांत भूषण: वरिष्ठ अधिवक्ता। देश का किसान चेहरा राकेश टिकैत के अलावा नेहा बोरा: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष। इसके अलावा इस गठबंधन में छात्र, युवा, किसान, दलित, आदिवासी, महिलाएं और अल्पसंख्यक संगठनों से जुड़े 14 से अधिक संगठन शामिल हैं, जो इस आंदोलन को एक व्यापक जन आंदोलन का रूप दे रहे हैं। विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) को भी इस आंदोलन को स्पोर्ट है।

देश व्यापी आंदोलन की शुरूआत

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास को रद्द करने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और प्रख्यात अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ इस आंदोलन का मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं।

मुख्य मांगें

ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निष्पक्षता न बरतने और कथित वोट कटौती को शह देने का आरोप लगाते हुए तुरंत पद से हटाने की मांग की जा रही है। चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तुरंत स्क्रैप किया जाए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत जानबूझकर पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तुरंत स्क्रैप किया जाए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत जानबूझकर पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए जा रहे हैं।

डा. परकला को लेकर सत्ता में हड़कंप

वित्त मंत्री के पति के ही सरकार विरोधी मंच पर आने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, जिससे विपक्ष को भी सरकार को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है। जमीनी स्तर पर बढ़ता यह विरोध आने वाले दिनों में मोदी सरकार के लिए कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मोर्चे पर बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है। [
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