कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डा. सतीश तीन लाख की रिश्वत के आरोप में किया था अरेस्ट
मेरठ। भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेस नीति का दावा करने वाली भाजपा के नेताओं को भ्रष्टाचारियों और रिश्वत खोरों से कोई परहेज बाकि नहीं रह गया लगता है। शायद यही वजह रही जो डासना जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद आज कैंट बोर्ड के हटा दिए गए मनोनीत सदस्य भाजपाइयों के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। इसको लेकर वहां मौजूद भाजपा नेता सवालों से भागते नजर आए।
बेगमपुल के समीप जीरो मोइल्स चौराहा स्थित छत्रपति शिवाजी स्मारक समिति की ओर से शिवाजी स्मारक पर शनिवार को पितृतर्पण यज्ञ और पूजन का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. सतीश शर्मा भी पहुंचे। इस दौरान वह तिलक लगाकर पूजा-पाठ करते और भाजपा नेताओं के साथ अनुष्ठान में शामिल होते नजर आए। गौरतलब है कि ने इसी साल विगत 30 मई को गांधी बाग के राजस्व ठेके से जुड़े मामले में ठेकेदार विक्की कश्यप की शिकायत पर डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्हें अंसल टाउन स्थित आवास से 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद की CBI कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्वेताश्व अग्रवाल के मुताबिक, न्यायमूर्ति विक्रमदीप चौहान की खंडपीठ ने डॉ. सतीश की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दी थी। जेल से बाहर आने के बाद डॉ. सतीश ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उन्हें फंसाया गया है।
CBI कोर्ट ने पहले जमानत निरस्त की थी
5 अगस्त को CBI कोर्ट ने डॉ. सतीश की जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की। CBI से मिली लिखित सूचना के आधार पर कैंट बोर्ड ने कैंटोनमेंट एक्ट, 2006 की धारा 34 के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा था। मंत्रालय की मंजूरी के बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई।
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