Home मेरठ कैंट बोर्ड में सीवीसी के अफसरों की आमद की आहट
मेरठ

कैंट बोर्ड में सीवीसी के अफसरों की आमद की आहट

कैंट बोर्ड में सीवीसी के अफसरों की आमद की आहट

Share
कैंट बोर्ड में सीवीसी के अफसरों की आमद की आहट
Share

विचित्र किंतु सत्य 30 मार्च 2021 के वर्कऑर्डर पर दंड भी भुगतान भी, देश भर की 62 छावनियों में मेरठ छावनी में कथित भ्रष्टाचार का दुर्लभ मामला पहुंचा सीवीसी तक

मेरठ। सीबीआई के सबसे ज्यादा छापों के लिए देश भर की तमाम 62 छावनियों में बदनाम मेरठ कैंट बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार के एक दुर्लभ और विचित्र मामले की शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली/Central Vigilance Commission तक पहुंची है, दावा है कि जिसका संज्ञान ले लिया गया है और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआई की तर्ज पर किसी भी अचानक केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली की टीम आकर धमक सकती है, इसकी आहट भी सुनाई दे रही है। जिस मामले का यहां आगे जिक्र किया जा रहा है उसकी शिकायत महानिदेशक रक्षा संपदा (DGDE), नई दिल्ली और सब एरिया कमांडर जो कैंट बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं उन्हें भी भेजी गयी है। यह पूरा मामला आगरा की मैसर्स अग्रवाल एंड कंपनी को कैंट बोर्ड द्वारा दिए गए एक ठेके से जुड़ा है और जिस घपले का जिक्र किया जा रहा है उस मामले को खुलासा भी उक्त ठेके का कथित साझीदार ने किया है।

यह है पूरा मामला

आगरा की अग्रवाल एंड कंपनी के कथित अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता सचिन गोयल ने कैंट बोर्ड के उच्च पदस्थअ अफसरों से जुड़े इस मामले को भ्रष्टाचार का दुर्लभ मामला बताते हुए अवगत कराया है कि उन्होंने उक्त ठेके का 30 मार्च 2021 वर्क ऑर्डर मिलने के बाद 01 अप्रैल 2021 से कार्य आरंभ हुआ, और उसी अनुपालन के आधार पर परिषद के अभिलेख (Page No. 443) में भुगतान की संस्तुति दर्ज है — भुगतान वास्तव में किया गया। इसी Work Order को “Backdated Work Order Issuing” का misconduct मानकर कैंट बोर्ड के सीईओ ने एक कारण बताओ नोटिस 28 फरवरी 2025 एवं Punishment Order No. 25 30 अप्रैल 2025 को कैंट बोर्ड के सेनेट्री सुप्रीटेंडेंट वी.के. त्यागी एवं अभिषेक गंगवार को Minor Penalty दी गई है।

भुगतान गलत या सजा

केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली को भेजी गयी शिकायत में सवाल उठाया गया है कि क्या कैंट बोर्ड Page No. 439 वाले Work Order 30 मार्च 2021 के आधार पर हुए भुगतान को वैध मानती है — हाँ अथवा नहीं? पत्र में फिर सवाल किया गया है कि यदि हाँ — तो स्पष्ट किया जाए कि जिस वर्क अर्डर के आधार पर भुगतान वैध माना गया, उसी को “Backdated” मानकर दंड किस अभिलेखीय आधार पर दिया गया, यदि नहीं — तो स्पष्ट किया जाए कि एक अवैध/Backdated Work Order के आधार पर किए गए भुगतान की वसूली (Recovery) अब तक क्यों नहीं की गई। और इससे भी बड़ा और प्रमुख सवाल यह कि कथित आरोप “misconduct & unfair act regarding issuing of back dated work order to the contractor” है। इस आरोप को सिद्ध करने के लिए सबसे आवश्यक तथ्य यह है कि स्पष्ट किया जाए कि Work Order कब तैयार/बनाया गया और Work Order कब जारी/dispatch किया गया। इन दोनों तिथियों के बिना “Issuing of Backdated Work Order” का आरोप स्वयं मिथ्या एवं आधारहीन सिद्ध होता है। SCN और Punishment Order में इन मूल तिथियों का पूर्ण अभाव इस आरोप को अभिलेखीय रूप से असमर्थित बना देता है।

अभिलेखीय रूप से असंभव

सचिन गोयल सवाल का कहना है कि तीसरा कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। भुगतान और दंड दोनों एक साथ केवल तभी सही हो सकते हैं जब एक ही दस्तावेज़ एक साथ वैध भी हो और Backdated भी — जो अभिलेखीय रूप से असंभव है। आरोप है कि यह भ्रष्टाचार का एक दुर्लभ मामला है जिसमें परिषद की कार्यवाही को सिद्ध करने के लिए किसी बाहरी साक्ष्य की आवश्यकता नहीं है। परिषद के अपने ही आधिकारिक अभिलेख दोनों संभावित उत्तरों में स्वयं को खंडित करते हैं। चाहे “हाँ” कहें या “नहीं” — कार्यवाही स्वयं अपने अभिलेखों के विरुद्ध self-contradictory सिद्ध होती है। यह स्वयं में गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

one + 4 =

Related Articles

भाजपा के शिक्षक-स्नातक प्रत्याशियों का नामांकन

भाजपा के शिक्षक-स्नातक प्रत्याशियों का नामांकन

कांग्रेस किसान यात्रा में उमड़ा जन सैलाब

कांग्रेस किसान यात्रा में उमड़ा जन सैलाब

यूपीआई पेमेंट पर शुल्क से व्यापारियों में उबाल

यूपीआई पेमेंट पर शुल्क से व्यापारियों में उबाल

कैंट अफसरों की बे-खबरी का अजीव आलम

कैंट अफसरों की बे-खबरी का अजीव आलम