मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह शबाना आजमी विशाल ददलानी भी शामिल
दिल्ली/मुंबई। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद हजारों युवा और प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे। इस प्रदर्शन को नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी प्रमुख फिल्मी हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिला। CJP ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज किया जाए। संगठन ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 10 अक्टूबर तक इस्तीफा नहीं दिया गया, तो देश भर से लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करेंगे। वहीं दूसरी ओर दिल्ली की यदि बात करें तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, वामपंथी दलों (जैसे AISA, SFI) और अन्य छात्र संगठनों ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, बैरिकेडिंग की और कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया। पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज, कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण सहित सात सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
ज्ञानेश पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव
राहुल गांधी, ममता बनर्जी और विपक्षी गठबंधन (INDIA) के नेता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। ममता बनर्जी ने तो उनके खिलाफ कार्रवाई और पश्चिम बंगाल में पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर दोबारा चुनाव कराने तक की मांग की है।
सब कुछ ठीक नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है। ज्ञानेश कुमार के दो सहयोगी आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश जोशी) द्वारा पिछले 10 महीनों में डिजिटल सिस्टम और वोटर रोल से जुड़े निर्णयों पर 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराने की बात सामने आई है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फैसले आम सहमति से लिए गए हैं, लेकिन इस अंदरूनी टकराव ने ज्ञानेश कुमार की स्थिति को कमजोर किया है। ज्ञानेश कुमार के लिए सबसे बड़ी कानूनी परेशानी सुप्रीम कोर्ट से आ सकती है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के कामकाज और SIR के फैसलों से जुड़ी याचिकाओं को जल्द सूचीबद्ध करने (Early Listing) पर सहमति जताई है। यदि सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची में गड़बड़ी या आंतरिक प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की अवैधता पाता है, तो ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने पर गंभीर संकट आ सकता है।
कम नहीं चुनौतियां
ज्ञानेश कुमार इस समय चौतरफा दबाव में हैं। हालांकि एक संवैधानिक पद (CEC) पर होने के कारण उन्हें हटाना आसान नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले बड़े आंदोलन की चेतावनी उनके कार्यकाल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
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