राशन घोटाले के मामलों में राशन डीलरों के लाइसेंस रद्द करने के प्रशासनिक फैसलों को पूरी तरह से बरकरार रखा
मेरठ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आधार कार्ड की हेराफेरी और फर्जीवाड़े के जरिए किए गए राशन घोटाले के मामलों में राशन डीलरों के लाइसेंस रद्द करने के प्रशासनिक फैसलों को पूरी तरह से बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि राशन वितरण में धांधली या कोटे में अनियमितता पाई जाती है, तो डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और लाइसेंस निरस्तीकरण के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। इस मामले को लेकर राशन डीलर अब रिट की बात कह रहे हैं।
लाइसेंस निरस्तीकरण पर मुहर
कोर्ट ने यूपी के सभी 43 जिलों के उन सैकड़ों राशन डीलरों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिनके लाइसेंस घोटाले और अनियमितताओं के कारण रद्द किए गए थे। अदालत ने यह भी व्यवस्था दी है कि राशन वितरण में गड़बड़ी और धांधली के मामलों में लंबी या विस्तृत जांच की आवश्यकता नहीं होती है, यह एक संक्षिप्त प्रक्रिया है जिसके तहत दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है। अदालत का मानना है कि यदि लाभार्थियों को पूरा अनाज नहीं मिला है या आधार सीडिंग के दौरान मृत व्यक्तियों/फर्जी आंकड़ों से राशन निकाला गया है, तो डीलर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
मेरठ में ₹350 करोड़ का राशन घोटाला
मेरठ में करीब ₹350 करोड़ का राशन घोटाला सामने आया था, जिसमें पूर्ति विभाग (Supply Department) के अधिकारियों की मिलीभगत से राशन की कालाबाजारी की गई थी। कुल मुकदमों की यदि बात की जाए तो मेरठ में पूर्ति निरीक्षकों और विभाग की तरफ से अलग-अलग थानों में राशन कालाबाजारी और धोखाधड़ी के 60 मुकदमे (FIR) दर्ज कराए गए थे। (शुरुआती जांचों और विभिन्न शिकायतों को मिलाकर यह संख्या करीब 90 तक भी पहुंची थी)। इस घोटाले की जांच के दायरे में मेरठ के 63 से अधिक राशन डीलर और आपूर्ति विभाग के 6 बड़े अधिकारी (पूर्ति निरीक्षक) आए थे।
कुल मुकदमे और आरोपी
पूरे प्रदेश में अलग-अलग जिलों को मिलाकर हजारों राशन डीलरों, सैकड़ों ऑपरेटरों और अपात्र कार्ड धारकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 तथा धोखाधड़ी (IPC 420) के तहत केस दर्ज किए गए। उदाहरण के तौर पर, केवल पड़ोसी जिले गाजियाबाद में ही एक साथ 102 राशन डीलरों सहित 195 लोगों पर एफआईआर हुई थी। पूरे प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में राशन डीलर, विभागीय ऑपरेटर, और दलाल जेल भेजे गए। हाल ही में, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और विजिलेंस की टीमों ने फरार चल रहे डीलरों और रिश्वतखोर अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इसके अलावा, प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए धांधली में शामिल सभी दोषी डीलरों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे। इस चर्चित राशन घोटाले में आपूर्ति विभाग के कई अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका सामने आयी थी। इस मामले में शासन की जांच रिपोर्ट और पुलिस (EOW/STF) की तफ्तीश के आधार पर की गई मुख्य कार्रवाइयां और शामिल हैं।
घोटाले की जांच के दौरान यह पाया गया कि अपात्र और फर्जी यूनिटों के जरिए राशन की कालाबाजारी अधिकारियों के डिजिटल आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करके की जा रही थी। लखनऊ से आई विभागीय जांच रिपोर्ट में मेरठ में तैनात रहे 6 पूर्ति निरीक्षकों (Supply Inspectors) की शह और संलिप्तता की पुष्टि हुई। घोटाले की जांच के दौरान यह पाया गया कि अपात्र और फर्जी यूनिटों के जरिए राशन की कालाबाजारी अधिकारियों के डिजिटल आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करके की जा रही थी। शासन के निर्देश पर इन सभी 6 पूर्ति निरीक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और पुलिस द्वारा इनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इनकी आईडी से डेटा में अवैध बदलाव किए गए थे। (प्रशासनिक सुरक्षा व कानूनी प्रक्रियाओं के कारण एफआईआर चार्जशीट में शामिल इन निरीक्षकों के नाम केस डायरी का हिस्सा बनाए गए)
मास्टर माइंड मेरठ का शहनवाज
शाहनवाज (मुख्य कंप्यूटर ऑपरेटर) यह तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी विकास गौतम का मुख्य कंप्यूटर ऑपरेटर था। इसने पूर्ति निरीक्षकों की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर डेटाबेस में आधार कार्डों की हेराफेरी की थी। पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। बताया जाता है कि प्रदेश भर के राशन घोटाले का असली मास्टर माइड यही शहनवाज था। यह व्यक्ति पूर्ति निरीक्षक की आईडी पर अवैध रूप से काम कर रहा था। शाहनवाज के साथ मिलकर यह ई-पॉस (e-POS) मशीनों का डेटा बदलता था। पुलिस ने इसे भी सह-आरोपी बनाकर जेल की सलाखों के पीछे भेजा। हालांकि अब यह जमानत पर बाहर है। राशन घोटाले के अतिरिक्त, मेरठ में राशन डीलरों के सत्यापन और कोटे की जांच के नाम पर वसूली करने वाले अधिकारियों पर भी विजिलेंस ने सीधा एक्शन लिया है।
Leave a comment