भारत में जान का खतरा बताते हुए मांगी थी शरण, नहीं मिल सका कनाडा में शरणार्थी होने का दर्जा
नई दिल्ली।भारत के हालात के चलते देश छोड़कर कनाडा गए भारतीय हरीश उनकी पत्नी सोनिका और बेटे जापेश और गोलश को कनाडा में शरणार्थी का दर्जा नहीं मिल सका। इस परिवार को ना चाहते हुए भी भारत लौटना पड़ रहा है। भारत में जान का खतरा बताते हुए इस परिवार ने कनाडा का रूख किया था। लेकिन कनाडा के अफसरों ने उनका सपना तोड़ दिया। डाई अधिकारियों ने उनके रिफ्यूजी (शरणार्थी) होने के दावे और मानवीय आधार पर देश में रहने की अपील को ठुकरा दिया। इसके बाद हरीश कुमार, उनकी पत्नी सोनिका और बच्चे- जापेश और गौलाश को भारत लौटना पड़ा है। हरीश अपने परिवार के साथ अप्रैल 2018 में कनाडा गए थे और अपनी जान को खतरा बताते हुए शरण मांगी थी।
भारत में बताया जान का खतरा
हरीश कुमार ने कनाडा में शरण मांगते हुए कहा था कि उन्होंने भारत इसलिए छोड़ा था क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा था। कनाडा में उनकी अपील के ऊपर कई सालों की कानूनी कार्यवाही के बाद परिवार को कनाडा छोड़ने का आदेश दिया गया। यह परिवार 7 सितंबर को कनाडा से भारत के लिए रवाना हो गए।
रिफ्यूजी होने का दावा खारिज
4 अगस्त को बताया गया था कि उनके रिफ्यूजी होने के दावे को खारिज कर दिया गया है और उन्हें 7 सितंबर तक कनाडा छोड़ना होगा। कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी को पिछले हफ्ते कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने हिरासत में ले लिया था। अप्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन इमिग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने इस निर्वासन की निंदा की। संगठन ने कहा कि हरीश ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे और कोविड महामारी के दौरान सामान पहुंचाने का काम करते रहे। जब कनाडाई अर्थव्यवस्था को उनकी मेहनत की जरूरत थी तो उन्हें जरूरी कर्मचारी कहा गया लेकिन संकट खत्म होने के बाद उनके सालों के काम, टैक्स और समुदाय में उनके योगदान ने उन्हें निर्वासन से नहीं बचाया। यह ठीक नहीं है।
Leave a comment