नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत और भारतीयों की तुलका नरक के द्वार से कर देना और भारत का सधी हुई प्रतिक्रया का देना! पड़ौसी देशों पाकिस्तान व बंगलादेश के अलावा भारतीय भी सवाल पूछ रहे हैं कि इतनी गंभीर टिपणी के बावजूद मोदी सरकार का इतना कोल्ड रेस्पांस इसकी वजह क्या है। जिन्हें साल 1970 के दशक याद हैं वो आज भी बताते हैं कि किस प्रकार से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा जी अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन को धमका दिया करती थीं। लेकिन अब वो हालात भारत के बाकि नहीं रहे गए हैं। इस सब घटनाक्रम के बीच भाजपा के नेता व संघ विचारक राममाधव का यूएस में एक कार्यक्रम में यह कह देना कि भारत की आखिर गलती क्या है। सब चीजें एक सीमा से ज्यादा बर्बाश्त की जा रही हें। विपक्षी दलों के इतर आम भारतीय भी जानना चाहता है कि मोदी सरकार के इस डर की वजह क्या है। दरअसल, अमेरिका में दक्षिणपंथी रेडियो होस्ट माइकल सैवेज ने टॉक रेडियो शो के एक एपिसोड में ये टिप्पणी की थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसे बिना कोई टिप्पणी किए शेयर कर दिया था। सैवेज ने इस टिप्पणी में कहा था, “यहां एक बच्चा जन्म लेते ही तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन या भारत या ग्रह के किसी अन्य नरक से पूरे परिवार को ले आते हैं। ”
2026 में डोनाल्ड ट्रंप के ईरान और अन्य भू-राजनीतिक मामलों में सीजफायर या नरम रुख अपनाने की मजबूरी के पीछे मुख्य रूप से तेजी से घटती लोकप्रियता, युद्ध का बढ़ता आर्थिक बोझ, और प्रमुख अमेरिकी मिसाइल भंडारों में कमी जैसे कारण हैं। ईरान के साथ तनाव के कारण अमेरिका पर भारी सामरिक दबाव है और वे युद्ध के खिलाफ घरेलू माहौल का सामना कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध की स्थिति में अमेरिकी शस्त्रागार (Missile Stockpile) पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे आपूर्ति में कमी आई है। अमेरिका में युद्ध के खिलाफ माहौल बन रहा है, जिससे ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है।
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