नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बारूद का बबंडर उठने को तैयार है। कोई पल की देरी हो रही है। ईरान के सशस्त्र बलों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध एक अवैध कृत्य है और यह समुद्री डकैती के बराबर है। अमेरिकी सेना का कहना है कि वह आज सुबह 10 बजे पूर्वी समय (14:00 जीएमटी) से ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी समुद्री यातायात को रोक देगी।
कई देश अमेरिका के खिलाफ
जो देश ईरान को टोल देकर स्ट्रेट होर्मूज से गुजरने को रजामंद हैं यूएस नेवी के द्वारा उनको रोकना या तलाशी लेने के सवाल पर तमाम देश अमेरिका के मुखर विरोधी हो गए हें। उनका कहना है कि ये दो फरीखों के बीच का सौदा है, इसमें तीसने यानि अमेरिका का कोई काम नहीं है। चीन और से अमेरिका की इस हरकत की सख्त लहजे में मजम्मत की है। साथ ही इस मसले पर अब अमेरिका पर मिडिल ईस्ट को आग में झोकने की कोशिश करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
वार्ता नाकाम होने का ठिकरा ट्रंप पर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि वाशिंगटन के “अतिवादी रवैये, बदलते लक्ष्यों और नाकाबंदी” के कारण पाकिस्तान में जो बातचीत चल रही थी, वह फेल हुई है। ईरान के सभी प्रस्ताव सकारात्मक थे। अमेरिका के वार्ता कार पहुंचे ही बातचीत को खराब और बेनतीजा खत्म करने के मकसद से। लेकिन बुरी खबर साउथ लेबनान से है। इजरायल की सेना ने साउथ लेबनान पर स्ट्राइक कर बारूद की बारिश की है,, जिसमें मारूब में कम से कम चार लोग मारे गए, जबकि इजरायली सैनिकों ने हिजबुल्लाह के साथ झड़पों के बीच बिन्त जबील शहर के सभी प्रवेश द्वारों पर कब्जा कर लिया।
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